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________________ ठाणं (स्थान) ३३६ स्थान ४ : सूत्र १६६-२०० दोणे णाममेगे अदीणपरिणते, दीन: नामैकः अदीनपरिणतः, अदीन रूप में परिणत होते हैं, ३. कुछ अदीणे णाममेगे दीणपरिणते, अदीन: नामैकः दीनपरिणतः, पुरुष अदीन, किन्तु दीन रूप में परिणत अदीणे णाममेगे अदीणपरिणते। अदीन: नामैकः अदीनपरिणतः । होते हैं, ४. कुछ पुरुष अदीन और अदीन रूप में परिणत होते हैं। १६६. चत्तारि पुरिसजाया पण्णत्ता, तं चत्वारि पुरुषजातानि प्रज्ञप्तानि, १६६. पुरुष चार प्रकार के होते हैंजहातद्यथा १. कुछ पुरुष दीन और दीन रूप वाले दोणे णाममेगे दीणरूवे, दीनः नामैक: दीनरूपः, होते हैं, २. कुछ पुरुष दीन, किन्तु अदीन दीणे णाममेगे अदीणरूवे, दीनः नामैकः अदीनरूपः, रूप वाले होते हैं, ३. कुछ पुरुष अदीन, अदीणे णाममेगे दीणरूवे, अदीन: नामैकः दीनरूपः, किन्तु दीन रूप वाले होते हैं, ४. कुछ पुरुष अदीणे णाममेगे अदीणरूवे। अदीन: नामैक: अदीनरूपः । अदीन और अदीन रूप वाले होते हैं। १६७. 'चत्तारि पुरिसजाया पण्णत्ता, तं चत्वारि पुरुजातानि प्रज्ञप्तानि, १६७. पुरुष चार प्रकार के होते हैंजहातद्यथा १. कुछ पुरुष दीन और दीन मन वाले दीणे णाममेगे दोणमणे, दीनः नामैकः दीनमनाः, होते हैं, २. कुछ पुरुष दीन, किन्तु अदीन दीणे णाममेगे अदीणमणे, दीन: नामैक: अदीनमना:, मन वाले होते हैं, ३. कुछ पुरुष अदीन, अदोणे णामभेगे दीणमणे, अदीन: नामैक: दीनमनाः, किन्तु दीन मन वाले होते हैं, ४. कुछ पुरुष अदोणे णाममेगे अदीणमणे। अदीनः नामैकः अदीनमनाः । अदीन और अदीन मन वाले होते हैं। १९८. चत्तारि पुरिसजाया पण्णत्ता, तं चत्वारि पुरुषजातानि प्रज्ञप्तानि, १६८. पुरुष चार प्रकार के होते हैंजहातद्यथा १. कुछ पुरुष दीन और दीन संकल्प वाले दीणे णाममेगे दीणसंकप्पे, दीनः नामैकः दीनसंकल्पः, होते हैं, २. कुछ पुरुष दीन, किन्तु अदीन दोणे णाममेगे अदीणसंकप्पे, दीन: नामक: अदीनसंकल्पः, संकल्प वाले होते हैं, ३. कुछ पुरुष अदीन, अदीणे णाममेगे दीणसंकप्पे, अदीन: नामैकः दीनसंकल्पः, किन्तु दीन संकल्प वाले होते हैं, ४. कुछ पुरुष अदोणे णाममेगे अदीणसंकप्पे। अदीनः नामैक: अदीनसंकल्पः । अदीन और अदीन संकल्प वाले होते हैं। १६६. चत्तारि पुरिसजाया पण्णत्ता, तं चत्वारि पुरुषजातानि प्रज्ञप्तानि, १९६. पुरुष चार प्रकार के होते हैंजहातद्यथा १. कुछ पुरुष दीन और दीन प्रज्ञा वाले दीणे णाममेगे दीणपण्णे, दीन: नामैक: दीनप्रज्ञः, होते हैं, २. कुछ पुरुष दीन, किन्तु अदीन दीणे णाममेगे अदीणपणे, दीनः नामैक: अदीनप्रज्ञः, प्रज्ञा वाले होते हैं, ३. कुछ पुरुष अदीन, अदीणे णाममेगे दीणपण्णे, अदीन: नामैक: दीनप्रज्ञः, किन्तु दीन प्रज्ञा वाले होते हैं, ४. कुछ पुरुष अदीणे णाममेगे अदीणपण्णे। अदीन: नामैक: अदीनप्रज्ञः । अदीन और अदीन प्रज्ञा वाले होते हैं। २००. चत्तारि पुरिसजाया पण्णता, तं चत्वारि पुरुषजातानि प्रज्ञप्तानि, २००. पुरुष चार प्रकार के होते हैंतदयथा १. कुछ पुरुष दीन और दीन दृष्टि वाले दीणे णाममेगे दीदिट्टी, दीन: नामैक: दीनदृष्टि:, होते हैं, २. कुछ पुरुष दीन, किन्तु अदीन दीणे णाममेगे अदीणदिट्ठी, दीन: नामकः अदीनदृष्टिः, दृष्टि वाले होते हैं, ३. कुछ पुरुष अदीन, अदीणे णाममेगे दोणदिट्ठी, अदीनः नामक: दीनदृष्टिः, किन्तु दीन दृष्टि वाले होते हैं, ४. कुछ अदीणे णाममेगे अदीणदिट्ठी। अदीन: नामैक: अदीनदृष्टिः । पुरुष अदीन और अदीन दृष्टि वाले होते हैं। Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003598
Book TitleAgam 03 Ang 03 Sthanang Sutra Thanam Terapanth
Original Sutra AuthorN/A
AuthorTulsi Acharya, Nathmalmuni
PublisherJain Vishva Bharati
Publication Year1990
Total Pages1094
LanguagePrakrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, & agam_sthanang
File Size23 MB
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