________________ तृतीय प्रामृत] एगे पुण एवमाहंसु८. ता बावरि दोधे, बावरि समुद्दे दिम-सरिया प्रोभासेंति जाव पगासेंति, एगे एवमाहंसु, एगे पुण एवमाहंसु९. ता बायालीसं दीवसयं, बायालीस समुद्दसयं चंदिम-सरिया ओभासेंति जाव पगासेंति, एगे एवमासुएगे पुण एवमाहंसु१०. ता बावरि दोवसयं बावरि समुद्दसयं चंदिम-सूरिया ओभासेंति, जाव पगासेंति, एगे एवमासु, एगे पुण एवमासु११. ता बायालीसं दीवसहस्सं, बायालीसं समुद्दसहस्सं दिन-सरिया ओभासेंति जाव पगा __ सेंति, एगे एवमाहंसु, एगे पुण एवमाहंसु१२. ता बावत्तरं दीवसहस्सं, बावतरं समुद्दसहस्सं चंदिम-सूरिया ओभाति जाव पगासेंति, एगे एवमाहंसु, वयं पुण एवं वयामो ता अयं णं जंबुद्दीवे दीवे सव्वदीव-समुदाणं सब्बम्भंतराए सव्वखुड्डागे वट्टे जाव जोयणसयसहस्समायाम-विक्खंभे णं तिणि जोयणसयसहस्साई, दोणि य सत्तावीसे जोयणसए, तिणि कोसे, अट्ठावीसं च धणुसयं, तेरस य अंगुलाई अद्धंगुलं च किंचि विसेसाहिए परिक्खेवेणं पण्णत्ते, से णं एगाए जगईए सव्वओ समंता संपरिक्खित्ते साणं जगई अट्ठ-जोयणाई उड्ड उच्चत्तण पण्णत्ता, एवं जहा जंबुद्दीवपण्णत्तीए जाव,' एवामेव सपुव्वावरे गं जंबुद्दीवे चोद्दस सलिलासयसहस्सा छप्पण्णं च सलिलासहस्सा भवतीतिमक्खायं, जंबुद्दीवे णं दोवे पंच चक्कभागसंठिए ? आहिएत्ति वएज्जा, प.–ता कहं जंबुद्दीवे दीवे पंच चक्कभागसंठिए ? आहिए ति वएज्जा, 1. जम्बूद्वीपप्रज्ञप्ति के प्रथम वक्षस्कार मूत्रांक '4 से पष्ठ वक्षस्कार सूत्रांक 125 पर्यन्त के सभी मूत्रों के पाठ यहाँ समझने की सूचना है। Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org