________________ परिशिष्ट] [227 दसवें प्राभूत का 22 (बाईसवाँ) प्राभूत-प्राभूत सूत्र 62 नक्षत्रसंख्या सीमाविष्कभ भाग नक्षत्र का नाम दो अभिजित अर्धक्षेत्र नक्षत्र 12 1005 दो शतभिष यावत् दो ज्येष्ठा समक्षेत्र नक्षत्र 30 2010 दो श्रवण यावत् दो पूर्वाषाढ़ा द्वयर्धक्षेत्र नक्षत्र 12 3015 दो उत्तराभाद्रपद यावत् दो उत्तराषाढ़ा 56 (नक्षत्र के नाम दसवें प्राभृत के दूसरे प्राभूत-प्राभृत में देखें) 1 अहोरात्र के 67 भाग की कल्पना करना चाहिये / --सूत्र 62 समाप्त। सूत्र 72 : बारहवाँ प्राभूत संवत्सरों का प्रमाण संवत्सर 5 प्रकार के कहे गये हैं--- 1. नक्षत्र संवत्सर 2. चन्द्र संवत्सर 3. ऋतु संवत्सर 4. आदित्य संवत्सर 5. अभिवर्धित संवत्सर। 1 नक्षत्र संवत्सर-नक्षत्र मास में 27 दिवस 21/67 मुहूर्त होते हैं। नक्षत्रमास 119 मुहूर्त 27/67 भागात्मक है / नक्षत्र संवत्सर के दिवस कितने ?-327 दिवस 51/67 भाग होते हैं / नक्षत्र संवत्सर 9832 मुहूर्त 56/67 भागात्मक है। 1 युग के 67 नक्षत्र होते हैं / 1 युग के 1830 दिवस होते हैं / नक्षत्रमास के दिवस ज्ञात करने के लिये 1830 को 67 से भाग देने पर 27 दिवस 21/67 भाग आते हैं। नक्षत्रमास के मुहूर्त जानने के लिये 1 दिवस के 30 मुहूर्त से नक्षत्रमास के दिवसों को गुणा करने पर मुहूर्तों की संख्या प्राप्त होगी१८३०४ 30 54900 --=819 मुहूर्त 27/67 भाग 6767 नक्षत्रसंवत्सर के दिवस ज्ञात करने के लिये नक्षत्रमास के दिवसों को 12 से गुणा करना चाहिये। Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org