________________ [191 उन्नीसवां:प्राभूत] चंदस्स परिवुट्टि-परिहाणी गाहाओकेणइ वडद चंदो ? परिहाणो केण हुंति चंदस्स ? कालो वा जोण्हो वा ? केणऽणुभावेण चंदस्स ? किण्हं राहुविमाणं णिच्चं चंदेण होइ अविरहियं / चउरंगुलमसंपत्तं, हिच्चा चंदस्स तं चरइ // बाट्टि बाटुिं, दिवसे दिवसे तु सुक्कपक्खस्स / जं परिवड्इ चंदो, खवेइ तं चेव काले णं / / पण्णरसइ भागेण :य चंदं पण्णरसमेव तं वरइ। पण्णरसइ भागेण य, पुणोऽवि तं चेव वक्कमइ / / एवं वड्डइ चंदो, परिहाणी एव होइ चंदस्स / कालो वा. जोहो वा, एवऽणुभावेण चंदस्स / अणवट्ठिया अवटिया वा जोइसिया गाहाओ-- अंतोमणुस्स खेत्ते, हवंति चारोगा उ उववण्णा / पंचविहा जोइसिया, चंदा सूरा गहगणा य॥ तेण परं जे सेसा, चंदाइच्च-गह-तार-णक्खत्ता। णथि गई गवि चारो, अवट्ठिया ते मुणेयव्वा / / अड्डाइजेसु दोव-समुद्देस जोइसियाणं पमाणं-- गाहाओएवं जंबुद्दीवे, दुगुणा, लवणे चउग्गुणा हुँति / लावणगा य तिगुणिया, ससि-सूरा धायइसंडे / दो चंदा इह दोवे, चत्तारि य सायरे लवणतोए / धायइसंडे दीवे, बारस चंदा य सूरा य॥ माणुसणगस्स बहिया जोइसियाणं पमाण गाहाओधायइसंडप्पभिइस्स, उहिट्ठा तिगुणिया भवे चंदा / आइल्लचंद सहिया, अणंतराणंतरे खेत्तेग / / Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org