________________ उन्नीसवां प्राभूत] [187 गाहाओ.--- चत्तालं चंदसयं, चत्तालं चेव सूरियाण, सयं / पोक्खरवरदीवम्मि य, चरति एए पभासंता॥ चत्तारि सहस्साई, बत्तीसं चेव हुति णक्खत्ता / छच्च सया; बावत्तरं, महागहा: बारह सहस्सा // छष्णउद्द] सबसहस्सा, चोत्तालोसं खलु भवे सहस्साई। चत्तारि यः सया खलु, तारागण कोडि कोडी णं / / माणुसुत्तरे पन्धए ता पुक्खरवरस्स णं दोवस्स बहुमज्झदेसभाए माणुसुत्तरेणामं पम्वएपण्णते, वट्ट वलयाकारसंठाणसंठिए जे णं पुक्खरवरं दीवं दुहा विभयमाणे विभयमाणे चिट्ठइ, तंजहा१. अभिंतरयुक्खरद्धं च, 2. बाहिरयुक्खद्धरद्धं चः। अभितर-पुक्खरद्ध-~ प. ता अभिब्तर-पुक्खरद्धे णं कि समचक्कवालसंठिए, :विसमचक्कवालसंठिए ? उ. ता समचक्कवालसंठिए, नो विसमचक्कवालसंठिए। प. ता अभितर-पुक्खरद्धे गं केवइयं चक्कवालविक्खंभेणं केवयं परिक्खेवेणं ? आहिए।त्ति वएज्जा। उ. ता अट्ठ जोयणसयसहस्साई चषकवालविक्खंभे णं, एक्का जोयणकोडी बायालीसं च सयसहस्साई तीसं च सहस्साई दो अउणापण्णे जोयणसए परिक्खेवेणं, आहिए त्ति वएज्जा, "अट्ठव सयसहस्सा अम्भितरपुक्ख रस्स विक्खंभो।"" 15. ता अमितरपुक्खरद्धे णं केवइया चंदा पभासेंसु वा, पभासिति बा, पभासिस्संति वा? 25. केवइया सूरा तवेंसु वा, तवेंति वा, तविस्संति वा ? 3 प. केवइया गहा चारं चरिसुवा, चरंति वा, चरिस्संति वा ? 4 प. केवइया णक्खता जोगं जोएंसु वा, जोएंति वा, जोइस्संति वा ? 5 प. केवइया तारामणकोडिकोडीओ सोभं सो.सु वा, सोभंति वा, सोभिस्संति वा? 1 उ. बावरिं चंदा पभासेंसु वा, पभासिति वा, पभासिस्संति वा / 1. ये गाथा के प्रारम्भ के दो पद हैं। Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org