________________ उन्नीसवां प्राभूत |153 . ता लवणसमुद्दे केवइयं चक्कवालविखंभेणं, केवइयं परिक्खेवेणं ? पाहिए ति वएज्जा। उ. ता दो जोयणसयसहस्साई चक्कवालविक्खंभेणं, पण्णरस जोयणसयसहस्साइं एक्कासीयं च सहस्साई सयं च एगूणचालीसं किंचि विसेसूर्ण परिक्खेवेगं / गाहापण्णरस सयसहस्सा, एक्कासीयं सयं च ऊतालं / किंचि विसेसेणूणो, लवणोदहिणो परिक्खेवो / 15. ता लवणसमुद्दे केवइया चंदा पभासिसु वा, पभासिति वा, पभासिस्संति वा? 25. केवइया सूरा विसु वा, तविति वा, तविस्संति वा ? 35. केवइया गहा चारं चरिसुवा, चरंति वा चरिस्संति वा ? 4 प. केवइया णक्खता जोगं जोइंसु वा, जोएंति वा, जोइस्संति वा ? 55. केवइया तारागण कोडाकोडीओ सोभं सोभेसु वा सोभंति वा सोभिस्संति वा ? 1 उ. ता लवणसमुद्दे चत्तारि चंदा पभासिसु वा, पभासिति बा, पभासिस्संति वा / 2 उ. चत्तारि सूरिया तविसु वा, तविति वा, तविस्संति वा। 3 उ. तिण्णि बावण्णा महग्गहसया चारं चर्चारसु वा चरंति वा, चरिस्संति वा / 4 उ. बारस णक्खत्तसयं जोगं जोएंसु वा जोएंति वा, जोइस्संति वा। 5 उ. दो सयसहस्सा सत्तट्टि च सहस्सा णव य सया तारागणकोडाकोडीणं सोभं सोभेसु वा, सोभंति वा, सोभिस्संति वा / गाहाओ--- चत्तारि चेव चंदा, चत्तारि य सूरिया लवणतोए। बारस णक्खत्तसयं, गहाण तिण्णेव बावण्णा // दोच्चेव सयसहस्सा, सद्धि खलु भवे सहस्साई। णव य सया लवणजले, तारागणकोडिकोडीणं / / धायईसंडदोवे ता लवणसमुदं धायईसंडे णामं दीवे वट्टे वलयागारसंठाणसंठिए सन्धओ समंता संपरिक्खित्ता णं चिट्ठइ। प. ता धायईसंडे णामं दीवे कि समचक्कवालसंठिए विसमचक्कबालसंठिए ? उ. ता धायईसंडे गामंदीबे समचक्कवालसंठिए, तो विसमचक्कवालसंठिए। Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org