________________ दशम प्राभूत [प्रथम प्राभृत प्राभृत णक्खत्ताणं प्रावलिया-णिवायजोगो य 32. प. ता कहं ते जोगे ति वत्थस्स आवलिया-णिवाए ? आहिए ति वएज्जा। उ. तत्थ खलु इमाओ पंच पडिवत्तीओ पण्णत्ताओ, तंजहातत्थेगे एवमाहंसु१. ता सव्वे वि णं णक्खत्ता, कत्तियादिया भरणिपज्जवसाणा पण्णत्ता, एगे एवमाहंसु / एगे पुण एवमाहंसु२. ता सन्वे वि णं णक्खत्ता, महादिया अस्सेस-पज्जवसाणा पण्णत्ता, एगे एवमाहंसु / एगे पुण एवमाहंसु३. ता सव्वे वि णं णक्खता, धणिट्ठादिया सवणपज्जवसाणा पण्णत्ता, एगे एवमाहंसु / एगे पुण एवमाहंसु-- 4. ता सव्वे वि णं णक्खत्ता, अस्सिणी-प्रादिया रेवईपज्जवसाणा पण्णत्ता, एगे एवमाहंसु / एगे पुण एवमाहंसु५. ता सम्वे वि णं णक्खत्ता, भरणीआदिया अस्सिणीपज्जवसाणा पण्णता, एगे एवमाहंसु / वयं पुण एवं वयामो ता सम्वे वि णं णक्खत्ता, अभिई आदिया, उत्तरासाढा पज्जवसाणा पण्णत्ता, तंजहा–अभिई सवणो जाव उत्तरासाढा।' OM 1. जंबुद्दीवे दीवे अभिइवज्जेहि सत्तावीसाए णक्वत्तेहि संयवहारे वट्टति / –एम. 27, मु. 2 Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org