________________ [सूर्यप्रज्ञप्तिसूत्र प. ता अउणसट्ठि-पोरिसी णं छाया दिवसस्स कि गए वा, सेसे वा ? उ. ता एगूणवीस-सय-भागे गए वा, सेसे वा। प. ता अउणसठिपोरिसो णं छाया दिवसस्स किं गए वा सेसे वा? उ. ता वावीसहस्सभागे गए वा सेसे वा। प. ता साइरेग-अउणसट्ठि-पोरिसी णं छाया दिवसस्स किं गए वा, सेसे वा ? उ. ता नस्थि किचि गए वा, सेसे वा।' तत्थ खलु इमा पणवीसविहा छाया पण्णत्ता, तंजहा 1. खंभ-छाया 2. रज्जु-छाया 3. पागार-छाया 4. पासाय-छाया 5. उग्गम छाया 6. उच्चत्तछाया 7. अणुलोम-छाया 8. पडिलोम-छाया है. आरंभिया-छाया 10. उवहया-छाया 11. समा-छाया 12. पडिहया-छाया 13. खील-छाया 14. पक्ख-छाया 15. पुरओउदया-छाया 16. पुरिम कंठभागुवगया-छाया 17. पच्छिम-कंठ-भागुवगया-छाया 18. छायाणुवाइणी-छाया 16. किटाणुवाइणीछाया 20. छाय-छाया 21. विक्कप्प-छाया 22. वेहास-छाया 23. कड-छाया 24. गोल-छाया 25. पिटुमोदग्गा-छाया। 1. यहाँ अंकित प्रश्नोत्तर यहाँ दी गई संक्षिप्त वाचना की सूचनानुसार संशोधित है। सूर्यप्रज्ञप्ति की '1 प्रा. स. / 2 शा. स.। 3 अ. सु. / 4 ह. न.' इन चारों प्रतियों में दिये गये प्रश्नोत्तर यहाँ दी गई संक्षिप्त वाचना की सचना से कितने विपरीत हैं ? यह निर्णय पाठक स्वयं करें। प. 'ता अद्धअउणसट्ठि पोरिसी णं छाया दिवसस्स किं गए वा, सेसे वा ? त. ता एगणवीससयभागे गए वा, सेसे वा / प. ता अउणसट्ठि पोरिसी गं छाया दिवसस्स किं गए वा, सेसे वा? उ. ता वावीस-सहस्स भागे गए वा, सेसे वा। प. ता साइरेग-अउणसट्ठि-पोरिसी णं छाया दिवमस्स कि गए वा, सेसे वा ? उ. ता नत्थि किंचि गए वा, सेसे वा / (क) यहाँ इन प्रश्नोत्तरों में व्यतिक्रम हो गया प्रतीत होता है। सर्वप्रथम साढे गुनसठ पौरुषी छाया का प्रश्नोत्तर है / द्वितीय प्रश्नोत्तर गुनसठ पौरुषी छाया का है / तृतीय प्रश्नोत्तर कुछ अधिक मुनसठ पौरुषी छाया का है। (ख) यहाँ प्रश्नों के अनुरूप उत्तर भी नहीं है। प्रथम प्रश्नोत्तर में—“साढे गुनसठ पौरुषी छाया, एक सो उन्नीस दिवस भाग से निष्पन्न होती है। ऐसा माना है किन्तु संक्षिप्तवाचना पाठ के सुचनानुसार एक सौ बीस दिवस से निष्पन्न होती है। द्वितीय प्रश्नोत्तर में-गुनसठ पौरुषी छाया की निप्पत्ति वावीस हजार दिवस भाग से होती हैऐसा माना है, किन्तु यह मानना सर्वथा असंगत है, क्योंकि संक्षिप्त वाचना के सूचनापाठ को टीका में एक एक दिवस भाग बढ़ाने का ही सूचन है। ततीय प्रश्नोत्तर में—प्रश्न ही असंगत है, क्योंकि संक्षिप्त वाचना के सूचनापाठ में अर्द्ध पौरुषी छाया से संबंधित प्रश्न हो तो यहां कहा गया उत्तरसूत्र यथार्थ है। Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org