________________ अष्टम प्रामृत] वासाउउ [क] ता जया णं जंबुद्दीवे वीवे मंदरस्स पब्बयस्स दाहिणड ढ वासाणं पढमे समए पडिवज्जइ, तया णं उत्तरड ऽवि वासाणं पढमे समए पडिवज्जइ / जया णं उत्तरड ढ वासाणं पढमे समए पडिवज्जइ, तया णं जंबुद्दीवे दीवे मंदरस्स पव्वयस्स पुरस्थिम-पच्चत्थिमे णं अणंतर-पुरक्खड-काल-समयंसि वासाणं पढमे समए पडिवज्जइ / [ख] ता जया णं जंबुद्दीवे दीवे मंदरस्स पव्वयस्स पुरथिमे णं वासाणं पढमे समए पडिवज्जइ, तया णं पच्चत्थिमेऽवि वासाणं पढमे समए पडिवज्जइ / जया णं पच्चस्थिमे णं वासाणं पढमे समए पडिवज्जइ, तया णं जंबुद्दोवे दोवे मंदरस्स पव्वयस्म उत्तर-दाहिणे णं अणंतरपच्छाकय-काल-समयंसि वासाणं पढमे समए पडिवन्ने भवइ / जहा समओ तहा 1. आवलिया, 2. आणापाण, 3. थेवे, 4. लवे, 5. मुहुत्ते, 6. अहोरत्ते 7. पक्खे, 8. मासे, एए अट्ठ आलावगा, जहा वासाणं तहा भाणियन्वा / / हेमत उउ (क) ता जया णं जंबुद्दीवे दोवे मंदरस्स पब्वयस्स दाहिणड्ढे हेमंताणं पढमे समए पडिवज्जइ, तया णं उत्तरढेऽवि हेमंतागं पढमे समए पडिवज्जइ / / जया णं उत्तर ड्ढे हेमंताणं पढमे समए पडिवज्जइ, तया णं जंबुद्दीवे दीवे मंदरस्स पन्वयस्स पुरस्थिम-पच्चत्थिमे णं अणंतर-पुरक्खड-काल-समयंसि हेमंताणं पढमे समए पडिवज्जइ / (ख) ता जया जं जंबुद्दीवे दीवे मंदरस्स पव्वयस्स पुरस्थिमे णं हेमंताणं पढमे समए पडिवज्जह, तया णं पच्चत्थिमेऽवि हेमंताणं पढमे समए पडिवज्जइ। जया णं पच्चस्थिमे णं हेमंताणं पढमे समए पडिवज्जइ, तया णं जंबुद्दीवे दीवे मंदरस्स पव्वयस्स उत्तर-दाहिणे णं अणंतर-पच्छाकड-काल-समयंसि हेमंताणं पढमे समए' पडिवज्जइ / जहा समओ तहा 1. आवलिया, 2. प्राणापाण, 3. थोवे, 4. लवे, 5. मुहुत्ते, 6. अहोरत्ते, 7. पक्खे, 8. मासे, एए अट पालावगा. जहा द्वेमंताणं तहा भाणियवा। 1. ऊपर सूत्र में पढमे समए' आठ स्थानों पर 'रेखांकित' हैं उन स्थानों में नीचे लिखे पालापक कहें, और प्रत्येक पालापक के दो दो सूत्र ऊपर के समान कहें-- 1. पढमा प्रावलिया, 2. पढमो प्राणापाण, 3. पढमे थोवे, 4. पढमे लवे, 5. पढमे महत्ते, 6. पढमे अहोरत्ते, 7. पढमे पक्खे, 8. पढमे मासे / 2. ऊपर सूत्र में 'पढमे समए' पाठ स्थानों पर है उन स्थानों पर नीचे लिखे पालाषक कहें, और प्रत्येक मालापक के ऊपर के समान दो दो सूत्र कहें१. पढमा प्रावलिया, 2. पढमो प्राणापाण, 3. पढमे थोवे, 4. पढमे लवे, 5. पढमे मुहत्ते, 6. पढमे अहोरत्ते, 7. पढमे पक्खे, 8. पढमे मासे / Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org