SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 112
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ 62] [सूर्यप्रज्ञप्तिसूत्र [ख] ता जया णं जंबुद्दीवे दीवे मंदरस्स पब्वयस्स पुरस्थिमे णं उक्कोसए अट्ठारसमहत्ते दिवसे भवइ, तया णं पच्चत्थिमेऽवि उक्कोसए अद्वारसमहुत्ते दिवसे भवइ।। जया णं पच्चत्थिमे णं उक्कोसए अट्ठारसमुहुत्ते दिवसे भवइ, तया णं जंबुद्दीवे दीवे मंदरस्स पव्वयस्स उत्तरदाहिणे णं जहणिया दुवालसमुहुत्ता राई भवइ / एवं एएण गमेणं णेयत्वं अट्ठारसमुहुत्ताणंतरे दिवसेसाइरेग-दुवालस-मुहुत्ता राई। सत्तरस-मुहुत्ते दिवसेतेरस-मुहुत्ता राई। सत्तरस-मुहत्ताणंतरे दिवसेसाइरेग-तेरस-मुहुत्ता राई। सोलस-मुहुत्ते दिवसे-- चोद्दस-मुहुत्ता राई। सोलस-मुहुत्ताणंतरे दिवसेसाइरेग-चोहस-मुहुत्ता राई। पण्णरस-मुहुत्ते दिवसेपण्णरस-महत्ता राई। पण्णरस-महत्ताणंतरे दिवसे--- साइरेग-पण्णरस-मुहुत्ता राई। चोड्स-महत्ते दिवसेसोलस-मुहुत्ता राई। चोद्दस-महत्ताणतरे दिवसे-- साइरेग-सोलस-मुहुत्ता राई / तेरस-मुहुत्ते दिवसेसत्तरस-मुहुत्ता राई। तेरस-मुहुत्ताणतरे दिवसे-- साइरेग-सत्तरस-मुहुत्ता राई / जहण्णए दुवालस-महत्ते दिवसे भवइ---- उक्कोसिया अट्ठारस-महत्ता राई भवइ एवं भाणियन्वं / ' 1. भग. श. 5, उ. 1, सु. 5-13 Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003484
Book TitleAgam 16 17 Suryaprajnapti Chandraprajnapti Sutra - Swe Mu Pu Agam 16 17
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMadhukarmuni, Kanhaiyalal Maharaj, Shobhachad Bharilla
PublisherAgam Prakashan Samiti
Publication Year1989
Total Pages300
LanguagePrakrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size7 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy