________________ प्रथम प्रज्ञापनापदा [57 रुरु कंडुरिया 'जारू छोरविराली तहेव किट्ठीया / हलिद्दा सिंगबेरे य ालगा मूलए इ य // 48 // कंबू य कण्हकडबू महुप्रो क्लई तहेव महुसिंगो / णिरुहा सप्पसुयंधा छिण्णरुहा चेव बीयरुहा // 46 / / पाढा ४मियवालुको महुररसा चेव परायवल्ली य।। पउमा य माढरी दंती चंडी किट्टि ति यावरा // 50 // मासपण्णी मुगापण्णी जीवियरसभेय रेणुया चेव / कापोली खीरकापोली तहा भंगी णही इ य // 51 // किमिरासि भद्दमुत्था णंगलई पलुगा इय। किण्हे पउले य हढे हरतणुया चेव लोयाणी // 52 // कण्हे कंदे वज्जे सूरणकंदे तहेव खल्लूडे / एए अणंतजोवा, जे यावऽण्णे तहाविहा // 53 / / [54-1 प्र] वे (पूर्वोक्त) साधारणशरीर बादरवनस्पतिकायिक जीव किस प्रकार के हैं ? [54-1 उ.] साधारणशरीर बादरवनस्पतिकायिक जीव अनेक प्रकार के कहे गए हैं / वे इस प्रकार [गाथार्थ --] अवक, पनक, शैवाल, लोहिनी, स्निहूपुष्प (थोहर का फूल), मिहू स्तिहू (मिहूत्थु), हस्तिभागा और अश्वकर्णी, सिंहकर्णी, सिउण्डी (शितुण्डी), तदनन्तर मुसुण्ढी // 47 / / रुरु, कण्डुरिका (कुण्डरिका या कुन्दरिका), जीरु (जारु), क्षीरविरा (डा)ली; तथा किट्टिका, हरिद्रा (हल्दी), शृगवेर (आदा या अदरक) और आलू एवं मूला / / 48 / / कम्बू (काम्बोज) और कृष्णकटबू (कर्णोस्कट), मधुक (सुमात्रक), वलकी तथा मधुशृगी, नोरूह, सर्पसुगन्धा, छिन्नरुह और बीजरुह / / 49 / / पाढा, मृगवालुकी, मधुररसा और राजपत्री, तथा पद्मा, माठरी, दन्ती, इसी प्रकार चण्डी और इसके बाद किट्टी (कृष्टि) // 50 // माषपर्णी, मुद्गपर्णी, जीवित, रसभेद, (जीवितरसह) और रेणुका, काकोली (काचोली), क्षीरकाकोली, तथा भृगी, (भंगी), इसी प्रकार नखी / / 5 / / कृमिराशि, भद्रमुस्ता (भद्रमुक्ता), नांगलको, पलुका (पेलुका), इसी प्रकार कृष्णप्रकुल, और हड, हरतनुका तथा लोयाणी / / 52 / / कृष्णकन्द, वज्रकन्द, सूरणकन्द, तथा खल्लर, ये (पूर्वोक्त) अनन्तजीव वाले हैं / इनके अतिरिक्त और जितने भी इसी प्रकार के हैं, (वे सब अनन्त जीवात्मक हैं।) / / 53 / / [2] तणमूल कंदमूले समूले ति यावरे / संखेज्जमसंखेज्जा बोधव्वाऽणंतजीवा य // 54 // सिंघाडगस्स गुच्छो अणेगजीवो उ होति नायब्यो। पत्ता पत्तेयजिया, दोण्णि य जीवा फले भणिता // 55 // . 1 जोरु / 2 किट्टोया ! 3 कंबूयं कन्नुक्कइ मुमत्तयो / 4 मियमालुकी। 5 रायवत्ती / 6 बेलुगा इय / Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org