________________ 52] [प्रज्ञापनासून [44 प्र.] वे (पूर्वोक्त) लताएँ किस प्रकार की होती हैं ? [44 उ.] लताएँ अनेक प्रकार की कही गई हैं। यथा--पद्मलता, नागलता, अशोकलता, चम्पकलता, और चूतलता, वनलता, वासन्तीलता, अतिमुक्तकलता, कुन्दलता और श्यामलता // 27 // और जितनी भी इस प्रकार की हैं, (उन्हें लता समझना चाहिए।) यह हुआ उन लताओं का वर्णन / 45. से कि तं वल्लीप्रो? वल्लीप्रो अणेगविहाम्रो पण्णत्तायो / तं जहा-- पूसफली कालिंगी तुबी तउसो य एलवालुको / घोसाडई' पडोला पंचंगुलिया य णालीया // 28 // कंगूया कद्दुइया कक्कोडइ कारियल्लई सुभगा। कुवधा(या) य वागली पाववल्लि तह देवदारूप य // 26 // अप्फोया अइमुत्तय णागलया कण्ह-सूरवल्ली य। संघट्ट सुमणसा बि य जासुवण कुविंदवल्ली य // 30 // मुद्दिय प्रष्पा भल्ली छीरविराली जियंति गोवाली। पाणी मासावल्ली गुंजावल्ली' य वच्छाणी'१ // 31 // ससबिंदु गोत्तफुसिया'२ गिरिकण्णइ मालुया य अंजणई / दहफुल्लइ3 कागणि' 4 मोगलो य तह प्रक्कबोंदी य / / 32 // जे यावऽण्णे तहप्पगारा / से तं वल्लीयो / [45 प्र.] वे (पूर्वोक्त) वल्लियां किस प्रकार की होती हैं ? [45 उ.] वल्लियां अनेक प्रकार की कही गई हैं। वे इस प्रकार हैं [गाथार्थ-] पूस फली, कालिंगी (जंगली तरबूज को बेल) तुम्बी, त्रपुषी (ककड़ी), एलवालुकी (एक प्रकार की ककड़ी), घोषातकी, पटोला, पंचांगुलिका और नालीका (प्रायनीली) // 28 / / कंगूका, कुद्दकिका (कण्डकिका), कर्कोटकी (कंकोड़ो या ककड़ी), कारवेल्लकी (कारेली), सुभगा, कुवधा (कुवया -कुयवाया) और वागली, पापवल्ली, तथा देवदारु (देवदाली) / / 26 / / अफ्फोया (अफेया), अतिमुक्तका, नागलता और कृष्णसूरवल्ली, संघट्टा और सुमनसा भी तथा जासुवन और कुविन्दवल्ली // 30 // मुद्रीका, अप्पा, भल्ली (अम्बावली), क्षीरविराली (कृष्णक्षीराली), जीयंती (जयन्ती), गोपाली, पाणी, मासाबल्ली, गुजावल्ली, (गुजीवल्ली) और वच्छाणी (विच्छाणी) // 31 / / शशबिन्दु, गोत्रस्पृष्टा (ससिवी, द्विगोत्रस्पृष्टा), गिरिकर्णकी, मालुका और अजनकी, दहस्फोटकी (दधिस्फोटकी), काकणी (काकली) और मोकली तथा अर्कबोन्दी / / 32 / / पाठान्तर--१ घोसाडइ पंडोला, घोसाई य पडोला। 2 आयणीली य। 3 कंडुइया। 4 कुवया, कुयवाया। 5 देवदालो य / 6 अफेया। 7 अम्बावल्ली। 8 किण्हछीराली। 9 जयंती। 10 गुजीवल्ली। 11 विच्छाणी / 12 ससिवी दुगोत्तफुसिया / 13 दहिफोल्लइ / 14 काकली / Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org