________________ प्रथम प्रज्ञापनापद] [51 [42 उ.] गुच्छ अनेक प्रकार के कहे गए हैं। वे इस प्रकार है-बैंगन, शल्यको, बोंडी (अथवा थुण्डकी) तथा कच्छुरी, जासुमना, रूपी, पाढकी, नीली, तुलसी तथा मातुलिंगी // 19 // कस्तुम्भरी (धनिया), पिप्पलिका, अलसी, बिल्वी, कायमादिका, चुच्चू (वुच्चु), पटोला, कन्दली, बाउच्चा (विकुर्वा), बस्तुल तथा बादर / / 20 / / पत्रपूर, शीतपूरक तथा जवसक, एवं निर्गुण्डी (निल्गु), अर्क (मृगांक), तूवरी (तबरी), अट्टकी (अस्तकी) और तलपुटा (तलउडादा) भी समझना चाहिए // 21 // तथा सण (शण), वाण (पाण), काश (कास), मद्रक (मुद्रक), आघ्रातक, श्याम, सिन्दुवार और करमर्द, आर्द्र डूसक (अडूसा) करीर (कैर), ऐरावण तथा महित्थ / / 22 / / जातुलक, मोल, परिली, गजमारिणी, कुर्चकारिका (कुर्वकारिका), भंडी (भंड), जावको (जीवकी), केतकी तथा गंज, पाटला, दासी और अंकोल्ल / / 23 // अन्य जो भी इसी प्रकार के (इन जैसे) हैं, (वे सब गुच्छ समझने चाहिए।) यह हुअा गुच्छ का वर्णन। 43. से कि तं गुम्मा ? गुम्मा प्रणेगविहा पण्णत्ता / तं जहा सेरियए' णोमालिय कोरंटय बंधुजीवग मणोज्जे। पोईय पाण कणइर कुज्जय तह सिंदुवारे य // 24 // जाई मोग्गर तह जूहिया य तह मल्लिया य वासंती। वत्थुल कच्छुल सेवाल गंठि मगदंतिया चेव // 25 // चंपगजीती गवणीइया य कुदो तहा महाजाई / एवमणेगागारा हवंति गुम्मा मुणेयब्वा // 26 // से तं गुम्मा / [43 प्र.] वे (पूर्वोक्त) गुल्म किस प्रकार के हैं ? [43 उ.] गुल्म अनेक प्रकार के कहे गए हैं। वे इस प्रकार--'सेरित क (सेनतक), नवमालती, कोरण्टक, बन्धुजीवक, मनोद्य, पोतिक (पितिक), पान, कनेर (कर्णिकार), कुर्जक (कुजक), तथा सिन्दुवार / / 24 / / जाती (जाई), मोगरा, जूही (यूथिका), तथा मल्लिका और वासन्ती, बस्तुल, कच्छल (कस्थुल), शैवाल, ग्रन्थि एवं मृगदन्तिका / / 25 / / चम्पक, जीती, नवनीतिका, कुन्द, तथा महाजाति; इस प्रकार अनेक आकार-प्रकार के होते हैं, (उन सबको) गुल्म समझना चाहिए / / 26 / / यह हुई गुल्मों की प्ररूपणा / / 44. से कितं लयाओ? लयानो प्रणेगविहाम्रो पण्णत्ताप्रो / तं जहा पउमलता नागलता असोग-चंपयलता य चूतलता / वणलय वासंतिलया अइमुत्तय-कुद-सामलता // 27 // जे यावऽण्णे तहप्पगारा / से तं लयात्रो। पाठान्तर-१ सेणयए। 2 कत्थल / 3 णीइया / Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org