________________ [प्रज्ञापनासूत्र 351. [1] सुवण्णकुमाराणं भंते ! देवाणं केवतियं कालं ठिती पण्णता ? गोयमा ! जहण्णेणं दस वाससहस्साई, उक्कोसेणं दो पलिप्रोवमाई देसूणाई। [351-1 प्र.] भगवन् ! सुपर्ण (सुवर्ण) कुमार देवों की स्थिति कितने काल तक की कही गई है ? [351-1 उ.] गौतम ! जघन्य दस हजार वर्ष की और उत्कृष्ट देशोन दो पल्योपम की है। [2] अपज्जत्तियाणं पुच्छा। गोयमा ! जहणेण वि उपकोसेण वि अंतोमहत्तं / [351-2 प्र.] भगवन् ! अपर्याप्तक सुपर्णकुमार देवों को स्थिति कितने काल तक की कही गई है ? [351-2 उ.] गौतम ! जघन्य अन्तर्मुहूर्त की और उत्कृष्ट भी अन्तर्मुहूर्त की है। [3] पज्जत्तियाणं पुच्छा। गोयमा ! जहणणं दस वाससहस्साई अंतोमहत्तणाई, उक्कोसेणं दो पलिग्रोवमाई देसूणाई अंतोमुत्तूणाई। [351-3 प्र.) भगवन् ! पर्याप्तक सुपर्णकुमार देवों की स्थिति कितने काल तक की कही गई है ? [351-3 उ.] गौतम ! जघन्य अन्तर्मुहूर्त कम दस हजार वर्ष की और उत्कृष्ट अन्तमुंहत कम देशोन दो पल्योपम की है। 352. [1] सुवण्णकुमारीणं भंते ! देवीणं पुच्छा / गोयमा ! जहण्णणं दस वाससहस्साई, उक्कोसेणं देसूर्ण पलिप्रोवमं / [352-1 प्र.] भगवन् ! सुपर्णकुमार देवियों की स्थिति कितने काल तक की कही गई है ? [352-1 उ.] गौतम ! जघन्य दस हजार वर्ष की और उत्कृष्ट देशोन पल्योपम की है। [2] अपज्जत्तियाणं पुच्छा। गोयमा ! जहण्णेण वि उक्कोसेण वि अंतोमहत्तं / [352-2 प्र.] भगवन् ! अपर्याप्त सुपर्णकुमार देवियों की स्थिति कितने काल तक की कही गई है ? [352-2 उ.] गौतम ! जघन्य अन्तर्मुहूर्त की और उत्कृष्ट भी अन्तर्मुहूर्त की है। [3] पज्जत्तियाणं पुच्छा। गोयमा ! जहणणं दस वाससहस्साई अंतोमुत्तूणाई, उक्कोसेणं देसूर्ण पलिअोवमं अंतोमुहुत्तूणं / Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org