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________________ 288] [ प्रज्ञापनासून [334] हे भगवन् ! अब मैं समस्त जीवों के अल्पबहुत्व का निरूपण करने वाले महादण्डक का वर्णन करूगा-१. सबसे कम गर्भव्युत्क्रान्तिक (गर्भज) हैं, 2. (उनसे) मानुषी (मनुष्यस्त्री) संख्यातगुणी अधिक हैं, 3. (उनकी अपेक्षा) बादर तेजस्कायिक-पर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं, 4. (उनसे) अनत्तरीपपातिक देव असंख्यातगणे हैं, 5. (उनकी अपेक्षा) ऊपरी वेयकदेव संख्यातगणे, (उनकी अपेक्षा) मध्यमवेयकदेव संख्यातगुणे हैं, 7. (उनकी अपेक्षा) निचले प्रैवेयक देव संख्यातगुणे हैं, 8. अच्युतकल्प-देव (उनसे) संख्यातगुणे हैं, ह. आरणकल्प के देव (उनसे) संख्यातगुणे हैं, 10, (उनसे) प्राणतकल्प के देव संख्यातगुणे हैं, 11. (उनसे) प्रानतकल्प के देव संख्यातगुणे हैं, 12. (उनकी अपेक्षा) सबसे नीची सप्तम पृथ्वी के नैरयिक असंख्यातगुणे हैं, 13. (उनसे) छठी तमःप्रभा पृथ्वी के नैरयिक असंख्यातगुणे हैं, 14. (उसकी अपेक्षा) सहस्रारकल्प के देव असंख्यातगुणे' हैं, 15. (उनकी अपेक्षा) महाशुक्रकल्प के देव असंख्यातगुणे हैं, 16. (उनकी अपेक्षा) पांचवीं धूमप्रभापृथ्वी के नैरयिक असंख्यातगुणे हैं, 17. (उनसे) लान्तककल्प के देव असंख्यातगुणे हैं, 18. (उनकी अपेक्षा) चौथी पंकप्रभापृथ्वी के नैरयिक असंख्यातगुणे हैं, 16. (उनसे) ब्रह्मलोककल्प के देव असंख्यातगुणे हैं, 20. (उनसे) तीसरी बालुकाप्रभापृथ्वी के नैरयिक असंख्यातगुणे हैं, 21. (उनसे) माहेन्द्रकल्प के देव असंख्यातगुणे हैं, 22. (उनकी अपेक्षा) सनत्कुमारकल्प के देव असंख्यातगुणे हैं, 23. (उनसे) दूसरी शर्कराप्रभा पृथ्वी के नैरयिक असंख्यातगुणे हैं, 24. (उनकी अपेक्षा) सम्मूच्छिम मनुष्य असंख्यात गुणे हैं, 25. (उनसे) ईशानकल्प के देव असंख्यातगुणे हैं, 26. ईशानकल्प की देवियां (उनसे) संख्यातगुणी हैं, 27. (उनकी अपेक्षा) सौधर्मकल्प के देव संख्यातगुणे हैं, 28. (उनको अपेक्षा) सौधर्मकल्प की देवियां संख्यातगुणी हैं, 26. (उनकी अपेक्षा) भवनवासी देव असंख्यातगुणे हैं, 30. (उनसे) भवनवासी देवियां संख्यातगुणी हैं, 31. (उनसे) प्रथम रत्नप्रभापृथ्वी के नैरयिक असंख्यातगुणे हैं, 32. (उनकी अपेक्षा) खेचर-पंचेन्द्रिय-तिर्यञ्चयोनिक-पुरुष असंख्यातगुणे हैं, 33. (उनसे) खेचरपंचेन्द्रिय-तिर्यंचयोनिक स्त्रियां असंख्यातगुणी हैं, 34. (उनसे) स्थलचर-पंचेन्द्रिय-तिर्यञ्चयोनिक पुरुष संख्यातगुणे हैं, 35. (उनसे) स्थलचर-पंचेन्द्रिय-तिर्यञ्चयोनिक स्त्रियाँ संख्यातगुणी हैं, 76. (उनकी अपेक्षा) जलचर-पंचेन्द्रिय तिर्यञ्चयोनिक पुरुष संख्यातगुणे हैं, 37. उनसे जलचर-पंचेन्द्रियतियंचयोनिक स्त्रियाँ संख्यातगुणी हैं, 38. (उनसे) वाणव्यन्तर देव संख्यातगुणे हैं, 36. (उनकीअपेक्षा) वाणव्यन्तर देवियों संख्यातगुणी हैं, 40. (उनकी अपेक्षा) ज्योतिष्क-देव संख्यातगुणे हैं, 41. (उनकी अपेक्षा) ज्योतिष्क-देवियाँ संख्यातगुणी हैं, 42. (उनसे) खेचर पंचेन्द्रिय तिर्यञ्चयोनिक नपुंसक संख्यातगुणे हैं, 43. (उनकी अपेक्षा) स्थलचर-पंचेन्द्रिय-तिर्यञ्चयोनिक नपुंसक संख्यातगुणे हैं, 44. (उनसे) जलचर-पंचेन्द्रिय-तिर्यञ्चयोनिकनपुसक संख्यातगुणे अधिक हैं, 45. (उनकी अपेक्षा) चतुरिन्द्रिय-पर्याप्तक संख्यातगुणे हैं. 46. (उनकी अपेक्षा) पंचेन्द्रिय-पर्याप्तक विशेषाधिक हैं, 47. (उनकी अपेक्षा) द्वीन्द्रिय-पर्याप्तक विशेषाधिक हैं, 48. (उनकी अपेक्षा) त्रीन्द्रिय-पर्याप्तक विशेषाधिक हैं, 46. (उनकी अपेक्षा) पंचेन्द्रिय अपर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं, 50. (उनसे) चतुरिन्द्रिय अपर्याप्तक विशेषाधिक हैं, 51. (उनसे) त्रीन्द्रिय अपर्याप्तक विशेषाधिक हैं, 52. (उनसे) द्वीन्द्रिय पर्याप्तक विशेषाधिक हैं, 53. (उनकी अपेक्षा) प्रत्येकशरीर बादर वनस्पतिकायिक-पर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं, 55. बादर निगोद-पर्याप्तक (उनसे) असंख्यातगुणे हैं, 54. (उनसे) बादर-पृथ्वीकायिक-पर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं, 56. (उनसे) बादर-अप्कायिक-पर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं, 57. (उनसे) बादर-वायुकायिक-पर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं, 58. बादर तेजस्कायिक-अपर्याप्तक (उनसे) असंख्यातगुणे हैं, 56. प्रत्येकशरीर-बादर-वनस्पतिकायिक-अपर्याप्त क (उनसे) असंख्यातगुणे हैं, 60. Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003483
Book TitleAgam 15 Upang 04 Pragnapana Sutra Stahanakvasi
Original Sutra AuthorShyamacharya
AuthorMadhukarmuni, Gyanmuni, Shreechand Surana, Shobhachad Bharilla
PublisherAgam Prakashan Samiti
Publication Year1983
Total Pages1524
LanguagePrakrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size37 MB
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