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________________ तृतीय बहुवक्तव्यतापद [27 खहयरपंचिदियतिरिक्खजोणिया पुरिसा असंखेज्जगुणा 32, खहयरपंचेंदियतिरिक्खजोणिणीसो संखेज्जगुणानो 33, थलयरपंचेंदियतिरिक्खजोणिया पुरिसा संखेज्जगुणा 34, थलयरपंचेंदियतिरिक्खजोणिणीसो संखेज्जगुणासो 35, जलयरपंचेंदियतिरिक्खजोणिया पुरिसा संखेज्जगुणा 36, जलयरपंचेंदियतिरिक्खजोणिणीनो संखेज्जगुणासो 37, वाणमंतरा देवा संखेज्जगुणा 38, वाणमंतरीश्रो देवीमो संखेज्जगुणानो 36, जोइसिया देवा संखेज्जगुणा 40, जोड सिणोप्रो देवीमो संखेज्जगुणासो 41, खहयरपंचेंदियतिरिक्खजोणिया णपुसया संखेज्जगुणा 42, थलयरपंचेंदियतिरिक्खजोणिया णपु सया संखेज्जगुणा 43, जलयरपंचेंदियतिरिक्खजोणिया णसया संखेज्जगुणा 44, चरिदिया पज्जत्तया संखेज्जगुणा 45, पंचेंदिया पज्जत्तया विसेसाहिया 46, बेइंदिया पज्जत्तया विसेसाहिया 47, तेइंदिया पज्जतया विसेसाहिया 48, पंचिदिया अपज्जत्तया असंखेज्जगुणा 46, चरिदिया अपज्जत्तया विसेसाहिया 50, तेइंदिया अपज्जत्तया विसेसाहिया 51, बेईदिया अपज्जत्तया विसेसाहिया 51, पत्तेयसरीरबादरवणप्फइकाइया पज्जत्तया प्रसंखेज्जगुणा 53, बादरणिगोदा पज्जत्तगा असंखेज्जगुणा 54, बादरपुढविकाइया पज्जत्तगा असंखेज्जगुणा 55, बादरग्राउकाइया पज्जत्तया असंखेज्जगुणा 56, बादरवाउकाइया पज्जत्तगा प्रसंखेज्जगुणा 57, बादरतेउकाइया अपज्जत्तगा असंखेज्जगुणा 58, पत्तेयसरीरबादरवणप्फइकाइया अपज्जत्तगा असंखेज्जगुणा 56, बादरणिगोदा अपज्जत्तया असंखेज्जगुणा 60, बादरपुढविकाइया अपज्जत्तगा असंखेज्जगुणा 61, बावरआउकाइया अपज्जत्तगा असंखेज्जगुणा 62, बादरवाउकाइया अपज्जत्तया असंखेज्जगुणा 63, सुहुमतेउकाइया अपज्जत्तया असंखेज्जगुणा 64, सुहमपुढविकाइया अपज्जत्तगा विसेसाहिया 65, सुहमप्राउकाइया अपज्जत्तगा बिसेसाहिया 66, सुहमवाउकाइया अपज्जत्तगा विसेसाहिया 67, सुहुमतेउकाइया पज्जत्तगा संखेज्जगुणा 68, सुहमपुढविकाइया पज्जत्तया विसेसाहिया 66, सुहुमआउकाइया पज्जत्तया विसेसाहिया 70, सुहमवाउकाइया पज्जत्तया विसेसाहिया 71, सुहमणिगोदा अपज्जत्तया असंखेज्जगुणा 72, सुहमणिगोदा तया संखेज्जगणा 73, प्रभवसिद्धिया अणंतगणा 74, परिबडितसम्मत्ता' अणंतगणा 75, सिद्धा अणंतगुणा 76, बादरवणस्सतिकाइया पज्जत्तगा प्रणंतगुणा 77, बादरपज्जत्तया विसेसाहिया 78, बादरवणस्सइकाइया अपज्जत्तया असंखेज्जगुणा 76, बादरअपज्जगा विसेसाहिया 80, बादरा बिसेसाहिया 81, सुहमवणस्सतिकाइया अपज्जत्तया असंखेज्जगुणा 82, सुहमा अपज्जत्तया विसेसाहिया 83, सुहुमवणस्सइकाइया पज्जत्तया संखेज्जगणा 84, सुहमपज्जत्तया विसेसाहिया 85, सुहमा विसेसाहिया 86, भवसिद्धिया विसेसाहिया 87, निगोदजीवा विसेसाहिया 88, वणप्फतिजीवा विसेसाहिया 86, एगिदिया विसेसाहिया 60, तिरिक्खजोणिया विसेसाहिया 61, मिच्छट्ठिी विससाहिया 62, अविरता विसेसाहिया 63, सकसाई विसेसाहिया 64, छउमस्था विसेसाहिया 65, सजोगी विसेसाहिया 66, संसारत्था विसेसाहिया 67, सव्वजीवा विसेसाहिया 68 / दारं 27 // ॥पण्णवणाए भगवईए तइयं बहुवत्तव्ययपयं समत्तं // 1. पाठान्तर-सम्मत्ता' के स्थान में 'सम्महिद्री' पद मिलता है। Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003483
Book TitleAgam 15 Upang 04 Pragnapana Sutra Stahanakvasi
Original Sutra AuthorShyamacharya
AuthorMadhukarmuni, Gyanmuni, Shreechand Surana, Shobhachad Bharilla
PublisherAgam Prakashan Samiti
Publication Year1983
Total Pages1524
LanguagePrakrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size37 MB
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