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________________ तृतीय बहुवक्तव्यतापद] [235 . गोयमा ! सम्वत्थोवा बादरवणस्सइकाइया पज्जत्तया 1, बादरवणस्सतिकाइया अपज्जत्तया असंखेज्जगुणा 2, सुहमवणस्सइकाइया अपज्जत्तगा असंखेज्जगुणा 3, सुहमवणस्सइकाइया पज्जत्तया संखेज्जगुणा 4 / [250-6 प्र.] भगवन् ! इन सूक्ष्म वनस्पतिकायिकों के पर्याप्तकों और अपर्याप्तकों में से कौन किनसे अल्प, बहुत, तुल्य और विशेषाधिक हैं ? [250-6 उ.] गौतम ! 1. सबसे कम बादर बनस्पतिकायिक-पर्याप्तक हैं, 2. (उनसे) बादर बनस्पतिकायिक-अपर्याप्तक जीव असंख्यातगुणे हैं, 3. (उनसे) सूक्ष्म वनस्पतिकायिक-अपर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं (और उनसे भी) 4. सूक्ष्म वनस्पति कायिक-पर्याप्तक संख्यातगुणे हैं। [7] एतेसि णं भंते ! सुहमनिगोदाणं बादरनिगोदाण य पज्जताऽपज्जत्ताणं कतरे कतरेहितो अप्पा वा बहुया वा तुल्ला वा विसेसाहिया वा? गोयमा ! सव्वत्योवा बादरनिगोदा पज्जत्तगा 1, बायरनिगोदा अपज्जत्तगा असंखेज्जगुणा 2, सुहुमनिगोया अपज्जत्तया असंखेज्जगुणा 3, सुहुमानगोदा पज्जतगा संखेज्जगुणा 4 / [250-7 प्र.] भगवन् ! इन सूक्ष्म निगोदों एवं बादर निगोदों के पर्याप्तकों तथा अपर्याप्तकों में से कौन किनसे अल्प, बहुत, तुल्य अथवा विशेषाधिक हैं ? 250-7 उ.] गौतम ! 1. सबसे थोड़े बादर निगोद-पर्याप्तक हैं, 2. (उनसे) बादर निगोदअपर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं, 3. (उनसे) सूक्ष्म निगोद-अपर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं, (और उनसे भी) 4. सूक्ष्म निगोद-पर्याप्तक संख्यातगुणे हैं / 251. एएसि णं भंते ! सुहमाणं सुहुमपुढविकाइयाणं सुहुमनाउकाइयाणं सुहुमतेउकाइयाणं सुहुमवाउकाइयाणं सुहमवणस्सइकाइयाणं सुहुमनिगोदाणं बादराणं बादरपुढविकाइयाणं बादरग्राउकाइयाणं बादरतेउकाइयाणं बादरवाउकायाणं बादरवणस्ततिकाइयाणं रबादरवणस्सइकाइयाणं बादरनिगोदाणं बादरतसकाइयाण य पज्जत्ताऽपज्जत्ताणं कतरे कतरेहितो प्रप्पा वा बहुया वा तुल्ला वा विसेसाहिया वा? गोयमा ! सम्वत्थोवा बादरतेउकाइया पज्जत्तया 1, बादरतसकाइया पज्जतगा असंखेज्जगुणा 2, बादरतसकाइया अपज्जत्तया असंखेज्जगुणा 3, पत्तेयसरीरबादरवणफइकाइया पज्जत्तया असंखेज्जगुणा 4, बादरनिगोदा पज्जत्तया असंखेज्जगुणा 5, बादरपुढविकाइया पज्जत्तगा असंखेज्जगुणा 6, बादरमा उकाइया पज्जत्तगा असंखेज्जगुणा 7, बादरवाउकाइया पज्जत्तया असंखेज्जगुणा 8, बादरतेउक्काइया अपज्जत्तया असंखेज्जगुणा 6, पत्तेयसरीरबादरवणफइकाइया अपज्जत्तगा असंखेज्जगुणा 10, बायरणिगोया अपज्जत्तया असंखेज्जगुणा 11, बादरपुढविकाइया अपज्जत्तया असंखेज्जगणा 12, बायरमा उकाइया अपज्जत्तया असंखेज्जगुणा 13, बादरवाउकाइया अपज्जत्तया असंखेज्जगुणा 14, सुहुमते उकाइया अपज्जत्तया असंखेज्जगुणा 15, सुहुमपुढविकाइया अपज्जत्तगा विसेसाहिया 16, सुहुमपाउकाइया अपज्जत्तया विसेसाहिया 17, सुहुमबाउकाइया अपज्जत्तया विसेसाहिया 18, सुहुमतेउकाइया पज्जत्तया असंखेज्जगुणा 16, सुहुमपुढविकाइया पज्जत्तगा विसे साहिया 20, सुहमपाउकाइया Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003483
Book TitleAgam 15 Upang 04 Pragnapana Sutra Stahanakvasi
Original Sutra AuthorShyamacharya
AuthorMadhukarmuni, Gyanmuni, Shreechand Surana, Shobhachad Bharilla
PublisherAgam Prakashan Samiti
Publication Year1983
Total Pages1524
LanguagePrakrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size37 MB
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