________________ 236 / [प्रज्ञापनासूत्र पज्जत्तया विसेसाहिया 21, सुहमवाउकाइया पज्जत्तया विसेसाहिया 22, सुहमनिगोदा अपज्जत्तया असंखेज्जगुणा 23, सुहमनिगोदा पज्जत्तया संखेज्जगुणा 24, बादरवणप्फइकाइया पज्जत्तया अणंतगुणा 25, बादरपज्जत्तमा विसेसाहिया 26, बादरवणफइकाइया अपज्जत्तगा असंखेज्जगुणा 27, बादरअपज्जत्तया विसेसाहिया 28, बादरा विसेसाहिया 29, सुहुमवणफतिकाइया अपज्जत्तगा असंखेज्जगणा 30, सुहमा अपज्जत्तया विसेसाहिया 31, सुहुमवणफतिकाइया पज्जत्तगा संखेज्जगुणा 32, सुहुमपज्जत्तया विसेसाहिया 33, सुहमा विसेसाहिया 34 / दारं 4 // [251 प्र.] भगवन् ! इन सूक्ष्म-जीवों, सूक्ष्म-पृथ्वीकायिकों, सूक्ष्म-अप्कायिकों, सूक्ष्मतेजस्कायिकों, सूक्ष्म-वायुकायिकों, सूक्ष्म-वनस्पतिकायिकों, सूक्ष्म-निगोदों, बादर-जीवों, बादर-पृथ्वीकायिकों, बादर-अप्कायिकों, बादर-तेजस्कायिकों, बादर-वायुकायिकों, बादर-वस्पतिकायिकों, प्रत्येकशरीर-बादर-वनस्पतिकायिकों, बादर-निगोदों और बादर-त्रसकायिकों के पर्याप्तकों और अपर्याप्तकों में से कौन किनसे अल्प, बहुत, तुल्य अथवा विशेषाधिक हैं ? [251 उ.] गौतम ! 1. सबसे अल्प बादर तेजस्कायिक पर्याप्तक हैं, 2. (उनसे) बादर त्रसकायिक पर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं, 3. (उनसे) बादर असकायिक अपर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं, 4. (उनसे) प्रत्येकशरीर बादर वनस्पतिकायिक पर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं, 5. (उनसे) बादर निगोद पर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं, 6. (उनसे) बादर पृथ्वीकायिक पर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं, 7. (उनसे) बादर अकायिक पर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं, 8. (उनसे) बादर वायुकायिक पर्याप्त असंख्यातगणे हैं, 1. (उनसे) बादर तेजस्कायिक अपर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं, 10. (उनसे) प्रत्येकशरीर बादर वनस्पतिकायिक अपर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं, 11. (उनसे) बादर निगोद अपर्याप्तक असंख्यातगणे हैं. 12. (उनसे) बादर पृथ्वीकायिक अपर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं, 13. (उनसे) बादर अकायिक अपर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं, 14. (उनसे) बादर वायुकायिक अपर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं, 15. (उनसे) सूक्ष्म तेजस्कायिक अपर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं, 16. (उनसे) सूक्ष्म पृथ्वीकायिक अपर्याप्तक विशेषाधिक हैं, 17. (उनसे) सूक्ष्म अप्कायिक अपर्याप्तक विशेषाधिक हैं, 18. (उनसे) सूक्ष्म वायुकायिक अपर्याप्तक विशेषाधिक हैं, 16. (उनसे) सूक्ष्म तेजस्कायिक पर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं, 20. (उनसे) सूक्ष्म पृथ्वीकायिक पर्याप्तक विशेषाधिक हैं, 21. (उनसे) सूक्ष्म अप्कायिक पर्याप्तक विशेषाधिक हैं, 22. (उनसे) सूक्ष्म वायुकायिक पर्याप्तक विशेषाधिक हैं, 23. (उनसे) सक्ष्म निगोद पर्याप्तक असंख्यातगणे हैं, 24. (उनसे) सक्ष्म निगोद पर्याप्तक संख्यातगा 25. (उनसे) बादर बनस्पतिकायिक पर्याप्तक अनन्तगुणे हैं, 26. (उनसे) बादर पर्याप्तक जीव विशेषाधिक हैं, 27. (उनसे) बादर वनस्पतिकाय अपर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं, 28 (उनसे) बादर अपर्याप्तक जीव विशेषाधिक हैं, 29. (उनसे) बादर जीव विशेषाधिक हैं, 30. (उनसे) सूक्ष्म वनस्पतिकायिक अपर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं, 31. (उनसे) सूक्ष्म अपर्याप्तक जीव विशेषाधिक हैं; 32. (उनसे) सूक्ष्म वनस्पतिकायिक पर्याप्तक संख्यातगुणे हैं, 33. (उनसे) सूक्ष्म पर्याप्तक जीव विशेषाधिक हैं, (और उनसे भी) 34. सूक्ष्म जीव विशेषाधिक हैं। चतुर्थ-द्वार / / 4 / / विवेचनकायद्वार के अन्तर्गत सूक्ष्म-बादर-कायद्वार–प्रस्तुत 15 सूत्रों (सू. 237 से 251 तक) में सूक्ष्म और बादर को लेकर कायद्वार के माध्यम से विभिन्न पहलुओं से अल्पबहुत्व का निरूपण किया गया है। Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org