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________________ तृतीय बहुवक्तव्यतापद [231 गुणा 5, बादरप्राउकाइया असंखेज्जगुणा 6, बादरवाउकाइया असंखेज्जगुणा 7, सुहमतेउकाइया असंखेज्जगुणा 8, सुहुमपुढविकाइया विसेसाहिया 6, सुहुम ग्राउकाइया विसेसाहिया 10, सुहुमबाउकाइया विसेसाहिया 11, सुहमणिगोदा असंखेज्जगुणा 12, बादरवणस्सइकाइया अणंतगुणा 13. बादरा विसेसाहिया 14, सुहुमवणस्सइकाइया असंखेज्जगुणा 15, सुहुमा विसेसाहिया 16 / [247 प्र.] भगवन् ! इन सूक्ष्मजीवों, सूक्ष्म-पृथ्वीकायिकों, सूक्ष्म-अप्कायिकों, सूक्ष्मतेजस्कायिकों, सूक्ष्मवनस्पतिकायिकों, सूक्ष्मनिगोदों तथा बादरजीवों, बादर-पृथ्वीकायिकों, बादरअप्कायिकों, बादर-तेजस्कायिकों, बादर-वायुकायिकों, बादर-वनस्पतिकायिकों, प्रत्येकशरीर-बादरवनस्पतिकायिकों, बादर-निगोदों और बादर-त्रसकायिकों में से कौन किनसे अल्प, बहुत, तुल्य अथवा विशेषाधिक हैं ? [247 उ.] गौतम ! 1. सबसे थोड़े बादर-त्रसकायिक हैं, 2. (उनसे) बादर तेजस्कायिक असंख्यातगुणे हैं, 3. (उनसे) प्रत्येकशरीर बादर-बनस्पतिकायिक असंख्यातगुणे हैं, 4. (उनसे) बादरनिगोद असंख्यातगुणे हैं, 5. (उनसे) बादर-पृथ्वीकायिक असंख्यातगुणे हैं, 6. (उनसे) बादरअप्कायिक असंख्यातगुणे हैं, 7. (उनसे) बादर-वायुकायिक असंख्यातगुणे हैं, 8. (उनसे) सूक्ष्मतेजस्कायिक असंख्यातगुणे हैं, ह. (उनसे) सूक्ष्म-पृथ्वीकायिक विशेषाधिक हैं, 10. (उनसे) सूक्ष्मअप्कायिक विशेषाधिक हैं, 11. (उनसे) सूक्ष्म-वायुकायिक विशेषाधिक हैं, 12. (उनसे) सूक्ष्मनिगोद असंख्यातगुणे हैं, 13. (उनसे) बादर-वनस्पतिकायिक अनन्तगुणे हैं, 14. (उनसे) बादरजीव विशेषाधिक हैं, 15. (उनसे) सूक्ष्म-बनपतिकायिक असंख्यातगुणे हैं 16. (और उनसे भी) सूक्ष्मजीव विशेषाधिक हैं। 248. एतेसि णं भंते ! सुहमअपज्जत्तयाणं सुहुमपुढविकाइयाणं प्रपज्जत्तगाणं सुहुमनाउकाइयाणं अपज्जत्तयाणं सुहमतेउकाइयाणं प्रपज्जत्तयाणं सुहमवाउकाइयाणं अपज्जत्तयाणं सुहमवणफइकाइयाणं अपज्जत्तगाणं सुहमणिगोदापज्जत्तयाणं बादरापज्जत्तयाणं बादरपुढविकाइयापज्जत्तयाणं बादरग्राउकाइयापज्जत्तयाणं बादरते उकाइयापज्जत्तयाणं बादरवाउकाइयापज्जत्तयाणं बादरवणप्फइकाइयापज्जत्तयाणं पत्तेयसरीरबादरवणफइकाइयापज्जत्तयाणं बादरणिगोदापज्जत्तयाणं बादरतसकाइयापज्जत्तयाणं कतरे कतरोहितो अस्पा वा बहुया वा तुल्ला वा विसेसाहिया वा? गोयमा ! सम्वत्थोवा बादरतसकाइया अपज्जत्तगा 1, बादरतेउकाइया अपज्जत्तगा असंखेज्जगुणा 2, पत्तेयसरीरबादरवणप्फइकाइया अपज्जत्तगा असंखेज्जगुणा 3, बादरणिगोदा अपज्जत्तया असंखेज्जगुणा 4, बादरपुढविकाइया प्रपज्जत्तगा असंखेज्जगुणा 5, बादरप्राउक्काइया अपज्जत्तगा असंखेज्जगुणा 6, बादरवाउकाइया अपज्जत्तगा असंखेज्जगुणा७, सुहुमतेउकाइया अपज्जत्तगा असंखेज्ज. गुणा 8, सुहुमपुढविकाइया अपज्जत्तगा विसेसाहिया 6, सुहृमनाउकाइया अपज्जत्तगा विसेसाहिया 10, सुहमवाउकाइया अपज्जतगा विसेसाहिया 11, सुहृमणिगोदा अपज्जत्तगा असंखेज्जगुणा 12, बादरवणप्फइकाइया अपज्जत्तगा अगंतगुणा 13, बादर अपज्जत्तगा विसेसाहिया 14, सुमवणफइकाइया अपज्जत्तगा प्रसंखेज्जगुणा 15, सुहृमा अपज्जत्तगा विसेसाहिया 16 / Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003483
Book TitleAgam 15 Upang 04 Pragnapana Sutra Stahanakvasi
Original Sutra AuthorShyamacharya
AuthorMadhukarmuni, Gyanmuni, Shreechand Surana, Shobhachad Bharilla
PublisherAgam Prakashan Samiti
Publication Year1983
Total Pages1524
LanguagePrakrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size37 MB
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