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________________ 230 [प्रज्ञापनासूत्र 246. एएसि णं भंते ! बावराणं बादरपुढविकाइयाणं बादरग्राउकाइयाणं बादरतेउकाइयाणं बादरवाउकाइयाणं बादरवणस्सइकाइयाणं पत्तयसरीरबादरवणप्फइकाइयाणं बादरनिगोदाणं बादरतसकाइयाण य पज्जत्ताऽयज्जत्ताणं कतरे कतरेहितो अप्पा वा बहुया वा तुल्ला वा विसेसाहिया वा ? गोयमा ! सम्वत्थोवा बादरतेउकाइया पज्जत्तया 1, बादरतसकाइया पज्जत्तया असंखेज्जगुणा 2, बादरतसकाइया अपज्जत्तगा असंखेज्जगुणा 3, पत्तेयसरीरबादरवणस्सइकाइया पज्जत्तगा असंखेज्जगुणा 4, बादरनिगोदा पज्जत्तगा असंखेज्जगुणा 5, बादरपुढविकाइया पज्जत्तगा असंखेज्जगुणा 6, बावराउकाइया पज्जत्तगा असंखेज्जगुणा 7, बादरवाउकाइया पज्जत्तगा असंखेज्जगुणा 8, बादरतेउकाइया अपज्जत्तगा असंखेज्जगुणा 6, पत्तेयसरीरबादरवणस्सइकाइया प्रपज्जत्तया असंखेज्ज. गुणा 10, बादरनिगोदा अपज्जत्तया असंखेज्जगुणा 11, बादरपुढधिकाइया अपज्जत्तया असंखेज्जगुणा 12, बादरग्राउकाइया अपज्जत्तया असंखेज्जगुणा 13, बादरवाउकाइया अपज्जत्तगा असंखेज्जगुणा 14, बादरवणस्सइकाइया पज्जत्तगा अणंतगुणा 15, बादरपज्जत्तगा बिसेसाहिया 16, बादरवणस्सइकाइया अपज्जत्तगा प्रसंखेज्जगणा 17, बादरनपज्जत्तगा विसेसाहिया 18, बादरा विसेसाहिया 16 / [246 प्र.] भगवन् ! इन बादर-जीवों, बादर-पृथ्वीकायिकों, बादर-अप्कायिकों, बादरतेजस्कायिकों, बादर-वायुकायिकों, बादर-वस्पतिकायिकों, प्रत्येकशरीर बादर-वनस्पतिकायिकों, बादर निगोदों और बादर त्रसकायिकों के पर्याप्तकों और अपर्याप्तकों में से कौन किनसे अल्प, बहुत, तुल्य अथवा विशेषाधिक हैं ? [246 उ.] गौतम ! 1. सबसे थोड़े बादर-तेजस्कायिक-पर्याप्तक हैं। 2. (उनसे) बादरत्रसकायिक-पर्याप्तफ असंख्यातगुणे हैं। 3. (उनसे) बादर-त्रसकायिक-अपर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं। 4. (उनसे) प्रत्येकशरीर बादर-वनस्पतिकायिक-पर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं। 5. (उनसे) बादरनिगोद-पर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं। 6. (उनसे) बादर-पृथ्वीकायिक-पर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं। 7. (उनसे) बादर-अप्कायिक-पर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं। 8. (उनसे) बादर-वायुकायिक-पर्याप्तक असख्यातगुण है। 6. (उनस) बादर-तेजस्कायिक-अपयोप्तक असंख्यातगुणं है / 10. (उनस) प्रत्येक. शरीर-बादर-वनस्पतिकायिक-अपर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं। 11. (उनसे) बादर-निगोद-अपर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं। 12. (उनसे) बादर-पृथ्वी कायिक-अपर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं। 13. (उनसे) बादर-अप्कायिक-अपर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं / 14. (उनसे)बादर-वायुकायिक-अपर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं / 15. (उनसे) बादर-वनस्पतिकायिक-पर्याप्तक अनन्तगुणे हैं। 16. (उनसे) बादर-पर्याप्तक विशेषाधिक हैं। 17. (उनसे) बादर बनस्पतिकायिक-अपर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं। 18. (उनसे) बादर-अपर्याप्तक विशेषाधिक हैं और 16. (उनसे भी) बादर जीव विशेषाधिक हैं। 247. एतेसि णं भंते ! सुहमाणं सुहमपुढविकाइयाणं सुहुमनाउकाइयाणं सुहुमतेउकाइयाणं सुहमवाउकाइयाणं सुहमवणफइकाइयाणं सुहुमनिगोदाणं बादराणं बादरपुढविकाइयाणं बादरग्राउकाइयाणं बादरतेउकाइयाणं बादरवाउकाइयाणं बादरवणप्फइकाइयाणं पत्तेयसरीरबायरवणफइकाइयाण बादरणिगोदाणं बादरतसकाइयाण य कतरे कतरोहितो अप्पा वा बहया वा तल्ला वा विसेस गोयमा ! सवत्थोबा बादरतसकाइया 1, बादरतेउकाइया प्रसंखेज्जगुणा 2, पत्तेयसरीरबादरवणप्फइकाइया असंखेज्जगुणा 3, बादरनिगोदा असंखेज्जगुणा 4, बादरपुढविकाइया असंखेज्ज. Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003483
Book TitleAgam 15 Upang 04 Pragnapana Sutra Stahanakvasi
Original Sutra AuthorShyamacharya
AuthorMadhukarmuni, Gyanmuni, Shreechand Surana, Shobhachad Bharilla
PublisherAgam Prakashan Samiti
Publication Year1983
Total Pages1524
LanguagePrakrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size37 MB
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