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________________ 232 ] [ प्रज्ञापनासूत्र [248 प्र. भगवन् ! इन सूक्ष्म-अपर्याप्तकों, सूक्ष्म-पृथ्वीकायिक-अपर्याप्तकों, सूक्ष्म-अप्कायिक अपर्याप्तकों, सूक्ष्म-तेजस्कायिक-अपर्याप्तकों, सूक्ष्म-वायुकायिक-अपर्याप्तकों, सूक्ष्म-वनस्पतिकायिकअपर्याप्तकों, सूक्ष्म-निगोद-अपर्याप्तकों, बादर-पृथ्वीकायिक-अपर्याप्तकों, बादर-अप्कायिकअपर्याप्तकों, बादर-तेजस्कायिक-अपर्याप्तकों, बादर वायुकायिक-अपर्याप्तकों, बादर-वनस्पतिकायिकअपर्याप्तकों, प्रत्येकशरीर बादर-वनस्पतिकायिक-अपर्याप्तकों, बादर-निगोद-अपर्याप्तकों, बादर निगोद-अपर्याप्तकों एवं बादर-त्रसकायिक-अपर्याप्तकों में से कौन किनसे अल्प, बहुत, तुल्य अथवा विशेषाधिक हैं ? [248 उ.] गौतम ! 1. सबसे थोड़े बादरत्रसकायिक-अपर्याप्तक हैं, 2. (उनसे) बादरतेजस्कायिक-अपर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं, 3. (उनसे) प्रत्येकशरीर-बादर वनस्पतिकायिक अपर्याप्तक असंख्यातगुण हैं, 4. (उनसे) बादरनिगोद-अपर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं, 5. (उनसे) बादर-पृथ्वीकायिक अपर्याप्तक असंख्यातगुण हैं, 6. (उनसे ) बादर अप्कायिक-अपर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं, 7. (उनसे) वादर-वायुकायिक-अपर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं, 8. (उनसे) सूक्ष्मतेजस्कायिकअपर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं, 6. (उनसे) सूक्ष्म-पृथ्वीकायिक-अपर्याप्तक विशेषाधिक हैं, 10. (उनसे) सूक्ष्म-अप्कायिक-अपर्याप्तक विशेषाधिक हैं, 11. (उनसे) सूक्ष्मवायुकायिक-अपर्याप्तक विशेषाधिक हैं, 12. (उनसे) सूक्ष्म-निगोद-अपर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं, 13. (उनसे) बादरवनस्पतिकायिक अपर्याप्तक अनन्तगुणे हैं, 14. (उनसे) बादर-अपर्याप्तक विशेषाधिक हैं, 15. (उनसे) सूक्ष्मवनस्पतिकायिक-अपर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं (और उनसे भी) 16. सूक्ष्म-अपर्याप्तक जीव विशेषाधिक हैं। 246. एतेसि णं भंते ! सुहमपज्जत्तयाणं सुहमपुढविकाइयपज्जत्तयाणं सुहुमनाउकाइयपज्जत्तयाणं सुहुमतेउकाइयपज्जत्तयाणं सुहुमवाउकाइयपज्जत्तयाणं सुहृमवणप्फइकाइयपज्जत्तयाणं सुहमनिगोयपज्जत्तयाणं बादरपज्जतयाणं बादरपुढविकाइयपज्जत्तयाणं बादरग्राउकाइयपज्जत्तयाणं बादरतेउकाइयपज्जत्तयाणं बादरवाउकाइयपज्जत्तयाणं बादरवणप्फइकाइयपज्जत्तयाणं पत्तेयसरीरबादरवणप्फइकाइयपज्जत्तयाणं बादरनिगोदपज्जत्तयाणं बादरतसकाइयपज्जत्तयाण य कतरे कतरेहितो अप्पा वा बहुया वा तुल्ला वा विसेसाहिया वा? गोयमा ! सम्वत्थोवा बादरतेउकाइया पज्जत्तगा 1, बादरतसकाइया पज्जत्तगा असंखेज्जगुणा 2, पत्तयसरीरबादरवणप्फइकाइया पज्जत्तगा असंखेज्जगुणा 3, बादरनिगोदा पज्जत्तया असंखेज्जगुणा 4, बादरपुढविकाइया पज्जत्तया असंखेज्जगुणा 5, बादरग्राउकाइया पज्जत्तया असंखेज्जगुणा 6, बादरवाउकाइया पज्जत्तया असंखेज्जगुणा 7, सुहुमतेउकाइया पज्जत्तया असंखेज्जगुणा 8, सुहुमपुढविकाइया पज्जत्तया विसेसाहिया 6, सुहुमनाउकाइया पज्जत्तया विसेसाहिया 10, सुहमवाउकाइया पज्जत्तया विसेसाहिया 11, सुहम निगोदा पज्जत्तया असंखेज्जगुणा 12, बादरवणष्फइकाइया पज्जत्तया अणंतगुणा 13, बादरा पज्जत्तया विसेसाहिया 14, सुटुमवणस्सइकाया पज्जत्तया असंखेज्जगुणा 15, सुटुमा पज्जत्तया विसेसाहिया 16 / [246 प्र.] भगवन् ! इन सूक्ष्म-पर्याप्तकों, सूक्ष्म-पृथ्वीकायिक-पर्याप्तकों, सूक्ष्म-अप्कायिकपर्याप्तकों, सूक्ष्म-तेजस्कायिक-पर्याप्तकों, सूक्ष्म-वायुकायिक-पर्याप्तकों, सूक्ष्म-वनस्पतिकायिक पर्याप्तकों, Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003483
Book TitleAgam 15 Upang 04 Pragnapana Sutra Stahanakvasi
Original Sutra AuthorShyamacharya
AuthorMadhukarmuni, Gyanmuni, Shreechand Surana, Shobhachad Bharilla
PublisherAgam Prakashan Samiti
Publication Year1983
Total Pages1524
LanguagePrakrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size37 MB
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