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________________ 226 ] [प्रज्ञापनासूत्र 242. एतेसि णं भंते ! बादराणं बादरपुढविकाइयाणं बादरप्राउकाइयाणं बादरतेउकाइयाणं बादरवाउकाइयाणं बादरवणस्सइकाइयाणं पत्तेयसरीरबादरवणफइकाइयाणं बादरनिगोदाणं बादरतसकाइयाण य कतरे कतरेहितो प्रप्पा वा बहुया वा तुल्ला वा विसेसाहिया वा ? गोयमा! सन्धत्थोवा बादरा तसकाइया 1, बादरा तेउकाइया असंखेज्जगुणा 2. पत्तेयसरीरबादरवणप्फइकाइया असंखेज्जगुणा 3, बादरा निगोदा असंखेज्जगुणा 4, बादरा पुढविकाइया असंखेज्जगुणा 5, बादरा पाउकाइया असंखेज्जगुणा 6, बादरा वाउकाइया असंखेज्जगुणा 7, बादरा वणप्फइकाइया अणंतगुणा 8, बादरा विसेसाहिया 6 / [242 प्र.] भगवन् ! इन बादर जीवों, बादर पृथ्वीकायिकों, बादर अप्कायिकों, बादर तेजस्कायिकों, बादर वायुकायिकों, बादर वनस्पतिकायिकों, प्रत्येकशरीर बादर वनस्पतिकायिकों, बादर निगोदों और बादर त्रसकायिकों में से कौन किनसे अल्प, बहुत, तुल्य अथवा विशेषाधिक हैं ? [242 उ.] गौतम ! 1. सबसे थोड़े बादर सकायिक हैं, 2. (उनसे) बादर तेजस्कायिक असंख्येयगणे हैं, 3. (उनसे) प्रत्येक शरीर बादर बनस्पतिकायिक असंख्येयगणे हैं, 4. (उनसे) बादर निगोद असंख्येयगुणे हैं, 5. (उनसे) बादर पृथ्वीकायिक असंख्येयगुणे हैं, 6. (उनसे) बादर अप्कायिक असंख्येयगुणे हैं, 7. (उनसे) बादर वायुकायिक असंख्येयगुणे हैं, 8. (उनसे) बादर वनस्पतिकायिक अनन्तगुणे हैं, और ह. (उनसे भी) बादर जीव विशेषाधिक है। 243. एतेसि गं भंते ! बादरअपज्जत्तगाणं बादरपुढविकाइयअपज्जत्तगाणं बादरप्राउकाइयअपज्जत्तगाणं बादरतेउकाइयनपज्जत्तगाणं बादरवाउकाइयश्रपज्जत्तगाणं बादरवणफइकाइयप्रपज्जत्तगाणं पत्तेयसरीरबादरवणाफइकाइयअपज्जत्तगाणं बादरनिगोदापज्जत्तगाणं बादरतसकाइयापज्जत्ताण य कतरे कतरेहितो प्रप्पा वा बहुंया वा तुल्ला वा विसेसाहिया वा ? गोयमा ! सम्वत्थोवा बादरतसकाइया अपज्जत्तगा 1, बादरतेउकाइया अपज्जत्तगा असंखेज्जगुणा 2, पत्तेयसरीरबादरवण'फइकाइया अपज्जत्तया असंखेज्जगणा 3, बादरनिगोदा प्रपज्जत्तगा असंखेज्जगुणा 4, बादरपुढविकाइया अपज्जत्तगा असंखेज्जगुणा 5, बादराउकाइया अपज्जत्तगा असंखेज्जगुणा 6, बादरवाउकाइया अपज्जत्तगा असंखेज्जगुणा 7, बादरवणप्फइकाइया अपज्जत्तगा अणंतगुणा 8, बादरअपज्जत्तगा विसेसाहिया है। __[243 प्र.] भगवन् ! इन बादर अपर्याप्तकों, बादर पृथ्वीकायिक-अपर्याप्तकों, बादर अप्कायिक-अपर्याप्तकों, बादर तेजस्कायिक-अपर्याप्तकों, बादर वायुकायिक-अपर्याप्तकों, बादर वनस्पतिकायिक-अपर्याप्तकों, प्रत्येकशरीर बादर वनस्पतिकायिक-अपर्याप्तकों, बादर निगोदअपर्याप्तकों एवं बादर त्रसकायिक-अपर्याप्तकों में से कौन किनसे अल्प, बहुत, तुल्य अथवा विशेषाधिक हैं ? [243 उ.] गौतम ! 1. सबसे कम बादर त्रसकायिक अपर्याप्तक हैं, 2. (उनसे) बादर तेजस्कायिक अपर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं, 3. (उनसे) प्रत्येकशरीर बादर वनस्पतिकायिक अपर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं, 4. (उनसे) बादर निगोद अपर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं, 5. (उनसे) बादर पृथ्वी Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003483
Book TitleAgam 15 Upang 04 Pragnapana Sutra Stahanakvasi
Original Sutra AuthorShyamacharya
AuthorMadhukarmuni, Gyanmuni, Shreechand Surana, Shobhachad Bharilla
PublisherAgam Prakashan Samiti
Publication Year1983
Total Pages1524
LanguagePrakrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size37 MB
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