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________________ 258] [प्रज्ञापनासूत्र विविध-समुद्घात-समवहत-असमवहत जीवादि के अल्पबहुत्व की प्ररूपणा 2125. एतेसि णं भंते ! जीवाणं वेयणासमुग्घाएणं कसायसमुग्घाएणं मारणंतियसमुग्धाएणं वेउव्वियसमुग्घाएणं तेयगसमुग्घाएणं पाहारगसमुग्धाएणं केवलिसमुग्घाएणं समोहयाणं असमोहयाण य कतरे कतरेहितो अप्पा वा बहुमा वा तुल्ला वा बिसेसाहिया वा? ___ गोयमा ! सम्वत्थोवा जीवा प्राहारगसमुग्धाएणं समोहया, केवलिसमुग्धाएणं समोहया संखेज्जगुणा, तेयगसमुग्धाएणं समोहया असंखेज्जगुणा, देउब्वियसमुग्घाएणं समोहया असंखेज्जगुणा, मारणंतियसमुग्धाएणं समोहया अणंतगुणा, कसायसमुग्घाएणं समोहया असंखेज्जगुणा, वेदणासमुग्घाएणं समोहया विसेसाहिया, असमोहया असंखेज्जगुणा। [2125 प्र.] भगवन् ! इन वेदनासमुद्घात से, कषायसमुद्घात से, मारणान्तिकसमुद्घात से, वैक्रियसमुद्घात से, तैजससमुद्घात से, आहारकस मुद्घात से और केवलिसमुद्धात से समवहत एवं असमबहत (अर्थात जो किसो भी समुद्घात से युक्त नहीं है-सर्वसमुद्घात से रहित) जीवों में कौन किससे अल्प, बहुत, तुल्य अथवा विशेषाधिक हैं ? [2125 उ.] गौतम ! सबसे कम पाहारकसमुद्घात से समवहत जीव हैं, (उनसे) केवलिसमुद्धात से समवहत जीव संख्यातगुणा हैं, (उनसे) तैजससमुद्घात से समवहत जीव असंख्यातगुणा हैं, (उनसे) वैक्रियसमुद्घात से समवहत जीव असंख्यातगुणा हैं, (उनसे) मारणान्तिकसमुद्घात से समवहत जीव अनन्तगणा हैं, (उनसे) कषायसमदघात से समवहत जीव असंख्यातगुणा हैं, (उनसे) वेदनासमदघात से समवहत जीव विशेषाधिक हैं और (इन सबसे) असमवहत जीव असंख्यातगुणा हैं। 2126. एतेसि णं भंते ! रइयाणं वेदणासमुग्घाएणं कसायसमुग्धाएणं मारणंतियसमुग्घाएणं वेउब्वियसमुग्धाएणं समोहयाणं असमोहयाण य कतरे कतरेहितो अप्पा वा बहुया या तुल्ला वा विसेसाहिया वा? __ गोयमा ! सव्वत्थोवा गैरइया मारणंतियसमुग्धाएणं समोहया, वेउब्वियसमुग्घाएणं समोहया असंखेज्जगुणा, कसायसमुग्घाएणं समोहया संखेज्जगुणा, वेदणासमुग्घाएणं समोहया संखेज्जगुणा, असमोहया संखेज्जगुणा। [2126 प्र.] भगवन् ! इन वेदनासमुद्घात से, कषायसमुद्घात से, मारणान्तिकसमुद्घात से एवं वैक्रियस मुद्घात से समवहत और असमवहत नैरयिकों में कौन किससे अल्प, बहुत, तुल्य अथवा विशेषाधिक हैं? 2126 उ.] गौतम ! सबसे कम मारणान्तिकसमुद्घात से समवहत नैरयिक हैं, (उनसे) वैक्रियसमुद्घात से समवहत नैरयिक असंख्यातगुणा हैं, (उनसे) कपायसमुद्घात से समवहत नैरयिक संख्यातगुणा हैं, (उनसे) वेदनासमुद्घात से समवहत नारक संख्यातगुणा हैं और (इन सबसे) असमवहत नारक संख्यातगुणा हैं। 2127. [1] एतेसि णं भंते ! असुरकुमाराणं वेदणासमुग्घाएणं कसायसमुग्धाएणं मारणंतियसमुग्घाएणं वेउब्वियसमुग्धाएणं तेयगसमुग्धाएणं समोहयाणं असमोहयाण य कतरे कतरेहितो अप्पा वा बहुया वा तुल्ला वा विसेसाहिया वा ? Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003483
Book TitleAgam 15 Upang 04 Pragnapana Sutra Stahanakvasi
Original Sutra AuthorShyamacharya
AuthorMadhukarmuni, Gyanmuni, Shreechand Surana, Shobhachad Bharilla
PublisherAgam Prakashan Samiti
Publication Year1983
Total Pages1524
LanguagePrakrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size37 MB
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