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________________ 112 116 117 122 123 तिर्यक् का कथन जलचरों का वर्णन स्थलचरों का वर्णन खेचर-वर्णन गर्भज जलचरों का वर्णन , स्थलचरों का वर्णन खेचर-वर्णन मनुष्यों का प्रतिपादन देवों का वर्णन भवस्थिति का वर्णन त्रिविधाख्या द्वितीय प्रतिपत्ति तीन प्रकार के संसारसमापन्नक जीव स्त्रियों का वर्णन स्त्रियों की भवस्थिति का प्रतिपादन तिर्यंचस्त्री आदि को पृथक् पृथक् भवस्थिति मनुष्यस्त्रियों की स्थिति देवस्त्रियों की स्थिति वैमानिक देवस्त्रियों की स्थिति तिर्यंचस्त्री का तदरूप में प्रवस्थानकाल मनुष्यस्त्रियों का " , (स्त्रियों का) अन्तरद्वार अल्पबहुत्व स्त्रीवेद की स्थिति पुरुष सम्बन्धी प्रतिपादन पुरुष की कालस्थिति तियंच पुरुषों की स्थिति देव " पुरुष का पुरुषरूप में निरन्तर रहने का काल अन्तरद्वार अल्पबहुत्व पुरुषवेद की स्थिति नपुंसक की स्थिति नपंसकों की कायस्थिति 123 125 130 134 138 140 145 146 147 148 149 150 Movi 162 165 168 171 174 नपुंसकों का अल्पबहुत्व नपुसकवेद की बन्धस्थिति और प्रकार 180 [38] Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003482
Book TitleAgam 14 Upang 03 Jivabhigam Sutra Stahanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMadhukarmuni, Rajendramuni, Shobhachad Bharilla
PublisherAgam Prakashan Samiti
Publication Year1989
Total Pages736
LanguagePrakrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size19 MB
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