________________ विषयानुक्रम प्राथमिक उपोद्घात द्विविधाख्या प्रथम प्रतिपत्ति मंगलमय प्रस्तावना स्वरूप और प्रकार धर्मास्तिकाय की सिद्धि प्रधर्मास्तिकाय प्रद्धासमय रूपी अजीव जीवाभिगम का स्वरूप पोर प्रकार संसारसमापन्न जीवाभिगम प्रथम प्रतिपत्ति का कथन पृथ्वीकाय का कथन पर्याप्ति का स्वरूप किसके कितनी पर्याप्तियां पर्याप्त-अपर्याप्त के भेद सूक्ष्मपृथ्वीकायिक के 23 द्वारों का निरूपण बादर पृथ्वीकाय का वर्णन अपकाय का अधिकार बादर अपकायिक वनस्पतिकायिक जीवों का अधिकार बादर वनस्पतिकायिक साधारण वनस्पति का स्वरूप प्रत्येकशरीरी वनस्पति के लक्षण त्रसों का प्रतिपादन सूक्ष्म-बादर तेजस्कायिक , ,, वायुकाय प्रौदारिक त्रसों का वर्णन द्वीन्द्रियवर्णन श्रीन्द्रियों का वर्णन चतुरिन्द्रियों का वर्णन पञ्चेन्द्रियों का कथन [ 37 ] Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org