________________ 82] [जीवाजीवाभिगमसूत्र तंजहा-समुच्छिम पंचेंद्रियतिरिक्खजोणिया य गम्भवक्कंतिय पंचेंदियतिरिक्खजोणिया य / [33] पंचेन्द्रिय तिर्यंचयोनिक कौन हैं ? पंचेन्द्रिय तियंचयोनिक दो प्रकार के कहे गये हैं / यथा-- (1) संमूछिम पंचेन्द्रिय तिर्यंचयोनिक और (2) गर्भव्युत्क्रान्तिक पंचेन्द्रिय तियंचयोनिक / 34. से कि तं समुच्छिम पंचेदियतिरिक्खजोणिया ? समुच्छिम पंचेंदिय तिरिक्खजोगिया तिविहा पण्णता, तंजहाजलयरा, थलयरा, खहयरा। [34] संमूछिम पंचेन्द्रिय तिर्यंचयोनिक कौन हैं ? संमूछिम पंचेन्द्रिय तियंचयोनिक तीन प्रकार के हैं-- जलचर, स्थलचर और खेचर / जलचरों का वर्णन 35. से कितं जलयरा? जलयरा पंचविहा पण्णत्ता, संजहामच्छगा, कच्छभा, मगरा, गाहा, सुंसुमारा। से कितं मच्छा? एवं जहा पण्णवणाए जाव से यावणे तहप्पगारा / ते समासओ दुविहा पण्णता, तंजहापज्जत्ता य अपज्जत्ता य। तेसि णं भंते ! जीवाणं कतिसरीरगा पण्णत्ता ? गोयमा ! तो सरीरया पणत्ता, संजहा-ओरालिए, तेयए, कम्मए / सरीरोगाहणा जहण्णेणं अंगुलस्स असंखेज्जतिभागं, उक्कोसेणं जोयणसहस्सं / छेवट्टसंघयणी। हुंग्संठिया / चत्तारि कसाया, सग्णाओ वि, लेसाओ पंच, इंदिया पंच, समुग्घाया तिष्णि, जो सण्णी असण्णी, नपुंसकवेवा, पज्जसीओ अपज्जत्तीओ पंच, वो विट्ठीओ, दो वंसणा, दो नाणा, वो अन्नाणा, दुविहे जोगे, दुविहे उवओगे, माहारो छद्दिसि / __उववाओ तिरियमणुस्सेहितो, नो देवेहितो नो नेरइएहितो, तिरिएहितो असंखेज्जवासाउय वज्जेसु, प्रकम्मभूमग-अंतरवीवग-असंखेज्जवासाउयवज्जेसु / ठिई जहन्नेणं अंतोमुहुत्तं, उक्कोसेगंपुष्वकोडी / मारणंतियसमुग्घाएणं दुविहा वि मरंति / अणंतरं उज्वट्टिता कहिं (उववअंति)? नेरइएसु वि, तिरिक्खजोणिएसु वि, मणुस्सेसु वि, देवेसु वि / नेरइएसु रयणपहाए सेसेसु पडिसेहो। Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org