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________________ १०२] [ आवश्यकसूत्र दोहा अनन्त चौबीसी जिन नमू, सिद्ध अनन्ते कोड़। केवलज्ञानी गणधरा, बन्दू बे कर जोड़॥ १॥ दोय कोडि केवलधरा, विहरमान जिन बीस। सहस्र युगल कोडि नमू, साधु नमूं निशदीश ॥ २॥ धन साधु, धन साध्वी, धन-धन है जिन धर्म । ये समऱ्या पातक झरे, टूटे आठों कर्म ॥ ३ ॥ अरिहंत सिद्ध समरूं सदा, आचारज उपाध्याय। साधु सकल के चरण को, वन्दूं शीश नवाय ॥ ४॥ शासननायक सुमरिये, भगवन्त वीर जिणंद। अलिय विघन दूरे हरे, आपे परमानन्द ॥ ५॥ अंगुष्ठे अमृत बसे, लब्धि तणा भण्डार । श्री गुरु गौतम सुमरिये, वांछित फल दातार ॥ ६ ॥ गुरु गोविन्द दोनों खड़े, किसके लागूं पाय। बलिहारी गुरुदेव की, गोविन्द दियो बताय ॥७॥ लोभी गुरु तारे नहीं, तिरे सो तारणहार। जो तूं तिरियो चाह तो, निर्लोभी गुरु धार ॥ ८ ॥ साधु सती ने शूरमा, ज्ञानी ने गजदन्त। इतना पीछा ना हटे, जो जुग जाय पड़न्त ॥ ९ ॥ गुरु दीपक गुरु चांदणी, गुरु बिन घोर अंधार। पलक न विसरूं तुम भणी, गुरु मुझ प्राण आधार ॥१०॥ क्षामणासूत्र - आयरिय-उवज्झाए, सीसे साहम्मिए कुल-गणे य। जे मे केई कसाया, सव्वे तिविहेण खामेमि॥१॥ सव्वस्स समणसंघस्स, भगवओ अंजलि करिअ सीसे। सव्वं खमावइत्ता, खमामि सव्वस्स अहयंपि॥२॥ सव्वस्स जीवरासिस्स, भावओ धम्मनिहियनियचित्तो। सर्व खमावइत्ता, खमामि सव्वस्स अहयंपि॥३॥
SR No.003464
Book TitleAgam 28 Mool 01 Avashyak Sutra Stahanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMadhukarmuni, Shobhachad Bharilla, Mahasati Suprabha
PublisherAgam Prakashan Samiti
Publication Year1985
Total Pages204
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Ritual_text, Agam, Canon, Ritual, & agam_aavashyak
File Size4 MB
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