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________________ २५२ ] [ प्रज्ञापनासूत्र खेत्तोववायगती १ भवोववायगती उववायगती तिविहा पण्णत्ता । तं जहा २ णोभवोववातगती ३ । [१०९२ प्र.] उपपातगति कितने प्रकार की है ? [ १०९२ उ.] उपपातगति तीन प्रकार की कही गई है, यथा - १. क्षेत्रोपपातगति, २. भवोपपातगति और ३. नोभवोपपातगति । - १०९३. से किं तं खेत्तोववायगती ? खेत्तोववायगती पंचविहा पण्णत्ता । तं जहा - णेरड्यखेत्तोववातगती १ तिरिक्खजोणियखेत्तोववायगती २ मणूसखेत्तोववातगती ३ देवखेत्तोववातगती ४ सिद्धखेत्तोववायगती ५ । [१०९३ प्र.] क्षेत्रोपपातगति कितने प्रकार की है ? [१०९३ उ.] क्षेत्रोपपातगति पांच प्रकार की कही गई है । यथा- १. नैरयिकक्षेत्रोपपातगति, २ . तिर्यञ्चयोनिकक्षेत्रोपपातगति, ३. मनुष्यक्षेत्रोपपातगति, ४. देवक्षेत्रोपपातगति और ५. सिद्धक्षेत्रोपपातगति । १०९४. से किं तं णेरइयखेत्तोववातगती ? णेरइयखेत्तोववायगती सत्तविहा पण्णत्ता । तं जहा - रयणप्पभापुढविणेरड्यखेत्तोववातगती जाव अहेसत्तमापुढविणेरइयखेत्तोववायगती । से त्तं णेरइयखेत्तोववायगती । [१०९४ प्र.] नैरयिकक्षेत्रोपपातगति कितने प्रकार की है ? [१०९४ उ.] (वह) सात प्रकार की कही गई है- रत्नप्रभापृथ्वीनैरयिकक्षेत्रोपपातगति यावत् अधस्तनसप्तमपृथ्वीनैरयिकक्षेत्रोपपातगति । यह हुई नैरयिकक्षेत्रोपपातगति (की प्ररूपणा) । १०९५. से किं तं तिरिक्खजोणियखेत्तोववायगती ? तिरिक्खजोणियखेत्तोववायगती पंचविहा पण्णत्ता । तं जहा- एगिंदियतिरिक्खजोणियाखेत्तोववायगती जाव पंचेंदियतिरिक्खजोणियखेत्तोववागती । से त्तं तिरिक्खजोणियखेत्तोववायगती । [१०९५ प्र.] तिर्यञ्चयोनिक क्षेत्रोपपातगति कितने प्रकार की है ? [१०९५ उ.] (वह) पांच प्रकार की कही गई है, वह इस प्रकार - १. एकेन्द्रियतिर्यग्योनिकक्षेत्रोपपातगति, २. द्वीन्द्रियतिर्यग्योनिकक्षेत्रोपपातगति, ३. त्रीन्द्रियतिर्यग्योनिकक्षेत्रोपपातगति, ४. चतुरिन्द्रियतिर्यग्योनिकक्षेत्रोपपातगति और ५ . पंचेन्द्रियतिर्यग्योनिकक्षेत्रोपपातगति । यह हुआ तिर्यग्योनिकक्षेत्रोपपातगति का निरूपण । १०९६. से किं तं मणूसखेत्तोववायगई ? मणूसखेत्तोववायगई दुविहा पण्णत्ता । तं जहा सम्मुच्छिममणूसखेत्तोववायगती गब्भवक्कंतियमणुस्सखेत्तोववायगई । से त्तं मणूसखेत्तोववायगती ।
SR No.003457
Book TitleAgam 15 Upang 04 Pragnapana Sutra Part 02 Stahanakvasi
Original Sutra AuthorShyamacharya
AuthorMadhukarmuni, Gyanmuni, Shreechand Surana, Shobhachad Bharilla
PublisherAgam Prakashan Samiti
Publication Year1984
Total Pages545
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Metaphysics, & agam_pragyapana
File Size11 MB
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