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________________ पण्डित गेगर और भाण्डारकर ने सिलोन के पाली वंशानुक्रम के अनुसार बिम्बसार और शिशुनाग वंश को पृथक् बताया है। बिम्बसार शिशुनाग के पूर्व थे। १५ डाक्टर काशीप्रसाद का मन्तव्य है कि श्रेणिक के पूर्वजों का काशी के राजवंश के साथ पैत्रिक सम्बन्ध था, जहाँ पर तीर्थंकर पार्श्वनाथ ने जन्म ग्रहण किया था । इसलिए श्रेणिक का कुलधर्म निर्ग्रन्थ (जैन) धर्म था । आचार्य हेमचन्द्र ने भी राजा श्रेणिक के पिता प्रसेनजित को भगवान् पार्श्वनाथ की परम्परा का श्रावक लिखा है। १६ । श्रेणिक का जन्म-स्थान क्या था ? इस सम्बन्ध में जैन, बौद्ध और वैदिक परम्परा के ग्रन्थ मौन हैं। जैन आगमों में श्रेणिक के भंभसार, भिंभसार, भिंभीसार ये नाम मिलते हैं। १७ श्रेणिक बालक था, उस समय राजमहल में आग लगी। सभी राजकुमार विविध बहुमूल्य वस्तुएं लेकर भागे । किन्तु श्रेणिक ने भंभा को ही राजचिह्न के रूप में सारभूत समझकर ग्रहण किया । एतदर्थ उसका नाम भंभसार पड़ा। " अभिधान - चिन्तामणि, १९ उपदेशमाला, २० ऋषिमण्डल प्रकरण, २१ भरतेश्वरबाहुबली वृत्ति, २२ आवश्यकचूर्णि, २३ प्रभृति प्राकृत और संस्कृत के ग्रन्थों में भंभासार शब्द मुख्य रूप से प्रयुक्त हुआ है। भंभा, भिंभा और भिंभी ये सभी शब्द भेरी के अर्थ में प्रयुक्त हुए हैं । २४ बौद्धपरम्परा में श्रेणिक का नाम बिम्बिसार प्रचलित है। २५ बिम्बि का अर्थ "सुवर्ण" है। स्वर्ण के सदृश वर्ण होने के कारण उनका नाम "बिम्बिसार " पड़ा हो। २६ तिब्बती परम्परा मानती है कि श्रेणिक की माता का नाम बिम्बि था अतः वह बिम्बसार कहा जाता है। २७ जैन परम्परा का मन्तव्य है कि सैनिक श्रेणियों की स्थापना करने से उसका नाम श्रेणिक पड़ा। बौद्ध परम्परा का २८ १५. स्टडीज इन इण्डियन एन्टिक्वीटीज, पृ. २१५ - २१६ १६. त्रिषष्ठि १०/६/८ १७. क - ख ग - - सेणिए भंभसारे ज्ञाताधर्मकथा, श्रुत. १ अ. १३ दशाश्रुतस्कन्ध दशा १०, सूत्र - १ - सेणिए भंभसारे, सेणिए भिंभसारे घ - १८. क - - • सेणिए भिंभसारे ठाणांग सूत्र, स्थां. ९, पत्र ४५८ - सेणियकुमारेण पुणो जयढक्का कड्ढिया पविसिऊणं पिठणा तुट्ठेण तओ भणिओ सो भंभासारो । ख - • स्थानांग वृत्ति, पत्र ४६१-१ ग - त्रिषष्ठिशलाका- १०/६/१०९-११२ १९. अभिधानचिन्तामणि काण्ड ३, श्लोक ३७६ उपदेशमाला, सटीकपत्र ३२४ २०. २१. ऋषिमण्डलप्रकरण, पत्र १४३ २२. भरतेश्वरबाहुबली वृत्ति-पत्र विभाग १२२ २३. आवश्यकचूर्णि उत्तरार्ध पत्र १५८ • उववाई सूत्र, सू ७ – पृ. २३, सू ६ - पृ. १९ २४. पाइय-सद्द - महण्णवो, पृष्ठ ७९४-८०७ २५. इण्डियन हिस्टोरिकल क्वार्टर्ली, भाग १४, अंक २, जून १९३८, पृ. ४१५ २६. (क) उदान अट्ठकथा १०४ (ख) पाली इंग्लिश डिक्शनरी पृ. ११० २७. इण्डियन हिस्टोरिकल क्वार्टर्ली, भाग १४, अंक २, जून १९३८, पृ. ४१३ २८. श्रेणी: कायति श्रेणिको मगधेश्वरः । उपदेशमाला सटीक, पत्र ३३४-१ - • अभिधान चिन्तामणि स्वोपज्ञवृत्ति, मर्त्यकाण्ड श्लोक ३७६ [१९]
SR No.003449
Book TitleAgam 09 Ang 09 Anuttaropapatik Sutra Stahanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMadhukarmuni, Shreechand Surana
PublisherAgam Prakashan Samiti
Publication Year1981
Total Pages134
LanguagePrakrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Principle, & agam_anuttaropapatikdasha
File Size3 MB
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