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[उपासकदशांगसूत्र वेढेइ, वेढित्ता तिक्खाहिं विसपरिगयाहिं दाढाहिं उरंसि चेव निकुट्टेइ।
सर्परूपधारी देव ने जब श्रमणोपासक कामदेव को निर्भय देखा तो वह अत्यन्त क्रुध होकर सर्राटे के साथ उसके शरीर पर चढ़ गया। चढ़ कर पिछले भाग से उसके गले में तीन लपेट लगा दिए। लपेट लगाकर अपने तीखे, जहरीले दातों से उसकी छाती पर डंक मारा।
११०. तए णं से कामदेवे समणोवासए तं उज्जलं जाव' अहियासेइ।
श्रमणोपासक कामदेव ने उस तीव्र वेदना को सहनशीलता के साथ झेला। देव का पराभव : हिंसा पर अहिंसा की विजय
१११. तए णं से देवे सप्प-रूवे कामदेवं समणोवासयं अभीयं जाव पासइ, पासित्ता जाहे नो संचाएइ कामदेवं समणोवासयं निग्गंथाओ पावयणाओ चालित्तए वा खोभित्तए वा विपरिणामित्तए वा ताहे संते सणियं-सणियं पच्चोसक्कइ, पच्चोसक्कित्ता पोसह-सालाओ पडिणिक्खमइ, पडिणिक्खमित्ता, दिव्वं सप्प-रूवं विप्पजहइ, विप्पजहित्ता एगं महं दिव्वं देव-रूवं विउव्वइ।
हार-विराइय-वच्छं जाव (कडग-तुडिय-थंभिय-भुयं, अंगय-कुंडल-मट्ठगंडकण्णपीढ-धारिं, विचित्तहत्थाभरणं, विचित्तमाला-मउलि-मउडं, कल्याणग-पवरवत्थपरिहिवं, कल्लाणग-पवर-मल्लाणुलेवणं, भासुर-बोंदि, पलंबं-वणमालधरं, दिव्वेणं वण्णेणं, दिव्वेणं गन्धेणं, दिव्वेणं रूवेणं, दिव्वेणं फासेणं, दिव्वेणं संघाएणं, दिव्वेणं संठाणेणं, दिव्वाए इड्डीए, दिव्वाए जुईए, दिव्वाए पभाए, दिव्वाए छायाएं, दिव्वाए अच्चीए, दिव्वेणं तेएणं, दिव्वाए लेसाए) दस दिसाओ उज्जोवेमाणं पभासेमाणं, पासाईयं दरिसणिज्जं अभिरूवं पडिरूवं दिव्व देवरूवं विउव्वइ, विउव्वित्ता कामदेवस्स समणोवासयस्स पोसहसालं अणुप्पविसइ, अणुप्पविसित्ता अंतलिक्ख-पडिवन्ने सखिंखिणियाइं पंचवण्णाई वत्थाई पवर-परिहिए कामदेवं समणोवासयं एवं वयासी--हं भो! कामदेवा समणोवासया! धन्नेसि णं तुमं, देवाणुप्पिया! संपुण्णे, कयत्थे, कयलक्खणे, सुलद्धे णं तव देवाणुप्पिया! माणुस्सए जम्मजीवियफले, जस्स णं तव निग्गंथे पावयणे इमेयारूवा पडिवत्ती लद्धा, पत्ता, अभिसमण्णागया।
एवं खलु देवाणुप्पिया! सक्के, देविंदे, देव-राया जाव (वजपाणी, पुरंदरे, सयक्कऊ, सुहस्सक्खे, मघवं, पागसासणे, दाहिणड्डलोगाहिवई, बत्तीस-विमान-सय-सहस्साहिवई, ऐरावणवाहणे, सुरिंदे, अरयंबर-वत्थधरे, आलइय-मालमउडे, नव-हेम-चारू-चित्त-चंचलकुंडल-विलिहिजमाणगंडे, भासुरबोंदी, पलंब-वणमाले, सोहम्मे कप्पे सोहम्मवडेंसए १. देखें सूत्र-संख्या १०६ । २. देखें सूत्र-संख्या ९७।