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________________ विविधविषय निरूपण] [२०७ जइ कम्मभूमिग०, किं संखेज्जवासाउय० असंखेज्जवासाउय०? गोयमा! संखेन्जवासाउय०, नो असंखेज्जवासाउय०? जइ संखेज्जवासाउय०, किं पज्जत्तय० अपज्जत्तय०? गोयमा! पज्जत्तय०, नो अपज्जत्तय० । जइ पज्जत्तय० किं सम्मट्टिी० मिच्छदिट्ठी० सम्मामिच्छदिट्ठी०? गोयमा! सम्मद्दिट्ठी। नो मिच्छदिट्ठी नो सम्मामिच्छदिट्ठी। जइ सम्मदिट्ठी० किं संजय० असंजय० संजयासंजय०? गोयमा! संजय०, नो असंजय० नो संजयासंजय०। जड संजय० किं पमत्तसंजय०. अप्पमत्तसंजय? गोयमा! पमत्तसंजय०, नो अपमत्तसंजय०। जइ पमत्तसंजय०, किं इड्डिपत्त० अणिड्डिपत्त ? गोयमा! इडिपत्त०, नो अणिडिपत्त०। वयणा वि भाणियव्वा।। भगवन् ! आहारकशरीर कितने प्रकार का होता है ? गौतम! आहारक शरीर एक ही प्रकार का कहा गया है। भगवन् यदि एक ही प्रकार का कहा गया तो क्या वह मनुष्य-आहारकशरीर है अथवा अमनुष्यआहारकशरीर है। गौतम! मनुष्य-आहारकशरीर है, अमनुष्य-आहारकशरीर नहीं है। भगवन् ! यदि वह मनुष्य-आहारक शरीर है तो क्या वह गर्भोपक्रान्तिक मनुष्य-आहारक शरीर है अथवा सम्मूर्छिम मनुष्य-आहारकशरीर है? गौतम! वह गर्भोपक्रान्तिक मनुष्य-आहारक शरीर है, सम्मूच्छिम मनुष्य-आहारक शरीर नहीं है। भगवन् ! यदि वह गर्भोपक्रान्तिक मनुष्य-आहारक शरीर है, तो क्या वह कर्मभूमिज गर्भोपक्रान्तिक मनुष्य-आहारकशरीर है, अथवा अकर्मभूमिज गर्भोपक्रान्तिक मनुष्य-आहारकशरीर है ? गौतम! कर्मभूमिज गर्भोपक्रान्तिक मनुष्य-आहारकशरीर है, अकर्मभूमिज गर्भोपक्रान्तिक मनुष्यआहारकशरीर नहीं है। भगवन् ! यदि कर्मभूमिज गर्भोपक्रान्तिक मनुष्य-आहारकशरीर है, तो क्या वह संख्यातवर्षायुष्क कर्मभूमिज गर्भोपक्रान्तिक मनुष्य-आहारकशरीर है अथवा असंख्यातवर्षायुष्क कर्मभूमिज गर्भोपक्रान्तिक मनुष्य-आहारकशरीर है? गौतम! संख्यात वर्षायुष्क कर्मभूमिज गर्भोपक्रान्तिक मनुष्य-आहारकशरीर है, असंख्यात-वर्षायुष्क कर्मभूमिज गर्भोपक्रान्तिक मनुष्य-आहारकशरीर नहीं है। ___ भगवन् ! यदि संख्यात-वर्षायुष्क कर्मभूमिज गर्भोपक्रान्तिक मनुष्य आहारकशरीर है, तो क्या वह पर्याप्तक संख्यातवर्षायुष्क कर्मभूमिज गर्भोपक्रान्तिक मनुष्य-आहारकशरीर है अथवा अपर्याप्तक संख्यातवर्षायुष्क कर्मभूमिज गर्भोपक्रान्तिक मनुष्य-आहारकशरीर है ?
SR No.003441
Book TitleAgam 04 Ang 04 Samvayanga Sutra Stahanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMadhukarmuni, Hiralal Shastri
PublisherAgam Prakashan Samiti
Publication Year1991
Total Pages379
LanguagePrakrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Metaphysics, & agam_samvayang
File Size24 MB
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