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अगडदत्त
अत्थि जए सु-पसिद्धं सङ्खउरं पुर-वरं गुण-समिद्धं । तम्मि य राया जण-जणिय-तोसओ सुन्दरो नाम ॥ १ ॥ तस्स कुल-रूव-सरिसी समग-जण-जणिय-लोयणाणन्दा । अन्तेउरस्स पढमा सुलसा नामेण वर-भज्जा ॥ २ ॥ तीए कुच्छि-पसूओ पुत्तो नामेण अगडदत्तो त्ति । अणुदियहं सो पवरं वड़न्तो जोव्वणं पत्तो ॥ ३॥ सो य केरिसो---- धम्मत्य-दया-रहिओ गुरु-वयण-विवजिओ अलिय-वाई । पर-रमाण-रमण-कामो निस्सङ्के माण-सोण्डीरो ॥ ४ ॥ मज्ज पिएइ जयं रमेइ पिसियं महुं च भक्खेइ । नड-चेडय-वेसा-विन्द-परिगओ भमइ पुर-मज्झे ॥ ५ ॥ अन्नंमि दिणे रन्नो पुरवर-लोएण वइयरो सिट्ठो।। जह कुमरेण नराहिव नयरे असमञ्जसं विहियं ॥ ६ ॥ सुणिऊण पउर-वयणं राया गुरु कोव-जाय-रत्तच्छो । फुड-भिउडि-मासुर-सिरो एयं भाणउं समाढत्तो ॥ ७ ॥ रे रे भणह कुमार सिग्धं चिय वजिऊण मह विसयं । अन्नत्य कुणसु गमणं मा भणसु य ज न कहियं ति ॥ ८ ॥ नाऊण वइयरं सो कुमरो चइऊण निय-पुरं रम्मं । खम्ग-सहाओ चलिओ गुरु-माण-पवडियामरिसो ॥९॥ लाञ्चित्ता गिरि-सरि-काणणाइ-पुर-गोड-गाम-वन्दाई । निय-नयराओ दूरे पत्तो वाणारसिं नयरिं ॥ १० ॥ तिय-पचरमाईसं असहाओ भमइ नयर-मज्झमि । चिसे अमरिस-अत्तो करि व्य जहाओ परिमट्ठो ॥ ११ ॥
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