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________________ www बतलाइये ! ऐसे मनुष्यों को समझाना कितना मुश्किल है ? मेरे विश्वार से तो उतना ही, जितना कि एक जंगली आदमी को चिंतामणि रत्न का मूल्य-समझाना । ऐसे अनभिज्ञ लोगों ने ही इतिहास का कोई मूल्य न समझ कर हमारा अमूल्य साहित्य अथवा उनके बिखरे पत्रों को जल में गला कर, कूट पीस कर डाडे ( शेकरी बना दिये जो प्रायः धूल कचरा ढोने के काम आते । किसी विद्वान् ने ठीक ही कहा है कि- "मूर्ख सज्जन द्वारा जितना नुकसान होता है उतना विद्वान् शत्रु द्वारा नहीं होता है ।" अतः ऐसे मूर्ख सज्जनों से तो हज़ार हाथ दूर रहना ही अच्छा है। एक अंग्रेज विद्वान् ने कहा है कि:--- "People who take no pride in the noble achievements of remete aneerters will never achieve any thing worthy to be remembered with pride by remote decendents." [ By Lord Macauley - one of the Historians ] "जो जाति अपने पूर्वजों के श्रेष्ट कार्यों का अभिमान एवं स्मरण नहीं करती है, वह ऐसी कोई बात ग्रहण नहीं बहुत वर्ष पश्चात् उसकी संतान को सगर्व स्मरण करने योग्य हों । करेगी जो जब हम हमारे पूर्वजों की अच्छी बातों को ग्रहण नहीं करते हैं तो फिर हम अपनी संतान से थोड़ी सी भी आशा क्यों रखें कि वह हमारी किसी भी अच्छी बात का स्मरण कर सकेगी। बस, यही हमारे पतन की परम्परा है। एक दूसरा अंग्रेज विद्वान् कहता है : - "अगर आप किसी जाति एवं समाज को नष्ट करना चाहें तो पहिले उसका इतिहास नष्ट कर दीजिये, जिसके नष्ट होने से वह स्वयं ही नष्ट हो जायगा ।" यह सत्य ही है कि जिन जातियों का इतिहास नहीं है वे जातियां संसार में अधिक समय तक न टिकी हैं और न टिक सकती हैं । १ - इतिहास का महत्व: इतिहास आज संसार का एक मुख्य मौलिक विषय बन गया है। संसार भर के विद्वत्समाज में इतिहास का आसन सर्वोच्च एवं आदर्शमय है । इतिहास के अभाव से कोई भी जाति, समाज एवं राष्ट्र अधिक समय तक संसार में जोवित नहीं रह सकता है । इतिहास के अध्ययन से ही हम किसी जाति, समाज एवं राष्ट्र के पतनोत्थान के कारणों को जान सकते हैं । उसकी रक्षा करने को तत्पर हो सकते हैं । अतएव इतिहास ही साहित्य का सर्व प्रधान अंग है। बिना इतिहास के हमारा साहित्य अधूरा एवं अपूर्व रह जाता है । इतिहास के अभाव में हम यह कदापि नहीं जान सकते कि किन २ कारणों से किस देश, समाज एवं राष्ट्र का उत्थान- अभ्युदय एव पुनः पतन का श्री गणेश हुवा था और वह अपनी चरमसीमा तक पहुँच गया था तथा अब हमें कौन २ उपाय ग्रहण करने चाहिये जिस के द्वारा कि हमारा पुनः उत्थान हो सके । - अतः भूतकाल की परिस्थिति को जानने के लिए इतिहास ही हमारा सच्चा शिक्षक एवं अवलम्ब है । इतिहास ही हम भूले भटकर्ता को सच्चा पथ-प्रदर्शन कराने वाला परम मित्र का काम देता है अतएव इतिहास की हम जितनी महिमा एवं प्रशंसा करें उतनी ही थोड़ी है। कारण, इतिहास के अभाव से भविष्य की उन्नति का मार्ग साफ-स्वच्छ एवं निर्विघ्न बनाने में ऐसी २ उलझने उपस्थित हो जाती हैं कि जिससे पिण्ड छुडाना मुश्किल हो जाता है । भूतकालीन इतिहास से हम वर्त्तमान में भविष्य का मार्ग बड़ी सुविधा के साथ निर्माण कर सकते हैं। भूत-कालीन इतिहास वर्तमान में हम को ऐसी शिक्षायें देता है एवं ऐसी२ घटनाओं का बोध कराते हैं कि जिन के द्वारा भविष्य में अवनति मार्ग को त्याग कर भावी उन्नति मार्ग का अवलम्बन कर मानवत जाति की सेवा करते हुए भाग्यशाली बन सकते हैं। भूतकालीन इतिहास से हम उस समय की सब परिस्थति एवं घटनाओं का ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं। हमारा अतीत कैसा था, राजनैतिक सामाजिक, धार्मिक एवं जातियों प्रवृत्ति रीति-रिवाज़ कैसा था किन किन जातियों ने किनर साधनों एवं प्रयत्नों से अपनी उन्नति की थी । नि किन वीर पुरुषों ने देश-जाति के लिये सर्वस्व एवं आत्म बलिदान दिया था और अपनी कमनीय कीर्ति किस प्रका library.org विश्व व्यापी बना कर अमर बना दी थी तथा अपने इतिहास को सुवर्णाक्षरों में लिखा कर हमारे लिये पथ प्रदर्शक बना Jain गये हैं। प्राचीन काल में किस किस देश में क्या क्या उद्योग, कहा कौशल्य, वाणिज्य व्यापार और किस २ स्थान एवं
SR No.003211
Book TitleBhagwan Parshwanath ki Parampara ka Itihas Purvarddh 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGyansundarvijay
PublisherRatnaprabhakar Gyan Pushpamala Falodi
Publication Year1943
Total Pages980
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size32 MB
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