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________________ २८ साध्वाचार के सूत्र ३. चरम समय निर्ग्रन्थ अंतिम समय में वर्तमान निर्ग्रन्थ। ४. अचरम समय निर्ग्रन्थ अंतिम समय के अतिरिक्त शेष समय में वर्तमान निर्ग्रन्थ। ५. यथासूक्ष्मनिर्ग्रन्थ-प्रथम या अंतिम समय की अपेक्षा किए बिना सामान्य रूप से सभी समयों में वर्तमान निर्ग्रन्थ। प्रश्न ५५. निर्ग्रन्थ-निर्ग्रन्थ में ज्ञान कितने पाये जाते हैं ? उत्तर-चार केवलज्ञान को छोड़कर। प्रश्न ५६. निर्ग्रन्थ-निर्ग्रन्थ में चारित्र कितने पाये जाते हैं? उत्तर-यथाख्यात चारित्र।२ प्रश्न ५७. निर्ग्रन्थ-निर्ग्रन्थ में शरीर कितने पाये जाते हैं? उत्तर-शरीर तीन-औदारिक, तैजस और कार्मण। प्रश्न ५८. निर्ग्रन्थ-निर्ग्रन्थ में समुद्घात कितने पाये जाते हैं ? उत्तर-एक भी नहीं।' प्रश्न ५६. निर्ग्रन्थ-निर्ग्रन्थ आराधक अवस्था में काल धर्म प्राप्त करके कौन से देवलोक तक जा सकते हैं? उत्तर-पांच अनुत्तरविमान में। प्रश्न ६०. निर्ग्रन्थ-निर्ग्रन्थ उत्कृष्ट कितने भवों में होता हैं? . उत्तर-तीन भवों में। प्रश्न ६१. निर्ग्रन्थ-निर्ग्रन्थ निग्रंथता का प्रयोग एक जन्म की अपेक्षा कितनी बार करते हैं? उत्तर-दो बार। प्रश्न ६२. निर्ग्रन्थ-निर्ग्रन्थ निग्रंथता का प्रयोग तीन जन्मों की अपेक्षा कितनी बार करते हैं? उत्तर-पांच बार। प्रश्न ६३. निर्ग्रन्थ-निर्ग्रन्थ एक समय में कितने नए हो सकते हैं ? उत्तर-उत्कृष्ट एक सौ बासठ (चौपन उपशम श्रेणी वाले एवं एक सौ आठ क्षपक श्रेणी वाले) १. भगवती २५/६/३१३ ४. भगवती २५/६/४३८ २. भगवती २५/६/३०६ ५. भगवती २५/६/३३७ ३. भगवती २५/६/३२५ ६. भगवती २५/६/४१४ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003051
Book TitleSadhwachar ke Sutra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRajnishkumarmuni
PublisherJain Vishva Bharati
Publication Year2011
Total Pages184
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Philosophy
File Size6 MB
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