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________________ २४ साध्वाचार के सूत्र २. उपकरण-बकुश-जो साधु विभूषा के लिए अपने वस्त्रों को धोते हैं एवं धूप आदि से सुगंधित करते हैं तथा पात्र-दण्ड आदि को विशेष शोभायुक्त अथवा दर्शनीय बनाने का प्रयत्न करते हैं, वे उपकरण-बकुश होते हैं। प्रश्न २२. बकुश-निग्रंथ कितने प्रकार के होते हैं ? उत्तर-बकुश-निर्गंथ पांच प्रकार के होते हैं १. आभोग-बकुश-जानते हुए विभूषा का दोष लगाने वाले। २. अनाभोग-बकुश-अज्ञानवश या सहसा दोष लगाने वाले। ३. संवृत-बकुश-छिप कर दोष लगाने वाले। ४. असंवृत-बकुश-प्रकटरूप से दोष लगाने वाले। ५. यथासूक्ष्म-बकुश-सूक्ष्म दोष लगाने वाले। प्रश्न २३. बकुश निर्ग्रन्थ में ज्ञान कितने पाये जाते हैं? उत्तर-प्रथम तीन-मतिज्ञान, श्रुतज्ञान और अवधिज्ञान। प्रश्न २४. बकुश निर्ग्रन्थ में चारित्र कितने पाये जाते हैं ? उत्तर-प्रथम दो-सामायिक चारित्र और छेदोपस्थापनीय चारित्र। प्रश्न २५. बकुश निर्ग्रन्थ में शरीर कितने पाये जाते हैं ? उत्तर-चार-औदारिक, वैक्रिय, तैजस और कार्मण।' प्रश्न २६. बकुश निर्ग्रन्थ में समुद्घात कितने पाये जाते हैं? उत्तर-पांच-वेदनीय, कषाय, मारणांतिक, वैक्रिय और तैजस समुद्घात।' प्रश्न २७. बकुश निर्ग्रन्थ आराधक अवस्था में काल धर्म प्राप्त करके कौन से देवलोक तक जा सकते हैं ? उत्तर-बारहवें देवलोक तक। प्रश्न २८. बकुश निर्ग्रन्थ उत्कृष्ट कितने भवों में होता हैं ? उत्तर-आठ भवों में। प्रश्न २६. बकुशता निर्ग्रन्थ का प्रयोग एक जन्म की अपेक्षा कितनी बार करते हैं? उत्तर-उत्कृष्ट नौ सौ बार। १. स्थानांग ५/३/१८६ ५. भगवती २५/६/४३६ २. भगवती २५/६/३१२ ६. भगवती २५/६/३३७ ३. भगवती २५/६/३०४ ७. भगवती २५/६/४१४ ४. भगवती २५/६/३२४ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003051
Book TitleSadhwachar ke Sutra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRajnishkumarmuni
PublisherJain Vishva Bharati
Publication Year2011
Total Pages184
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Philosophy
File Size6 MB
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