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________________ ३. साधु प्रकरण प्रश्न १. साधु किसे कहते है ? उत्तर - पांच महाव्रतों की साधना करने वाला व्यक्ति साधु कहलाता हैं । प्रश्न २. साधु कितने प्रकार के होते हैं ? उत्तर—आगमों में पांच प्रकार के साधुओं का उल्लेख हैं १. जैनमुनि - 'निर्ग्रथ' २. बुद्ध के भिक्षु - 'शाक्य' ३. जंगलों में तपस्या करने वालों जटाधारी साधु-संन्यासी 'तापस' ४. गेरुरंग के वस्त्र पहनने वाले त्रिदंडी साधु 'गैरुक' ५. गोशालक के मतानुयायी साधु 'आजीवक'" कहलाते हैं । ' प्रश्न ३. निर्ग्रथ की व्याख्या एवं प्रकार बताइये ? उत्तर-ग्रंथ का अर्थ है परिग्रह । वह दो प्रकार का है-आभ्यन्तर और बाह्य । मिथ्यात्व आदि आभ्यन्तर ग्रंथ है और धर्मोपकरण के अतिरिक्त धनधान्यादि बाह्य ग्रंथ है। दोनों प्रकार के ग्रंथों से जो मुक्त है, उसका नाम निर्ग्रथ है । प्रश्न ४. निर्ग्रथ कितने प्रकार के माने गये हैं? उत्तर-निर्ग्रथ पांच प्रकार के माने गये हैं - १. पुलाक २. बकुश ३. कुशील ४. निग्रंथ ५. स्नातक | प्रश्न ५. पुलाकनिर्ग्रथ का क्या स्वरूप है ? उत्तर - साररहित धान्य को पुलाक कहते हैं । तप और ज्ञान से प्राप्त लब्धि के प्रयोग द्वारा बल - वाहनसहित चक्रवर्ती आदि का मान मर्दन करने से तथा ज्ञानादि के अतिचारों का सेवन करने से जिनका संयम पुलाकवत् साररहित हो जाता है, वे पुलाकनिग्रंथ कहलाते हैं । इनके दो भेद हैं- लब्धिपुलाक और प्रतिसेवनापुलाक । १. प्रवचन सारोद्धार ६४ द्वार ७३१ २. (क) भगवती २५ / ६ / २७८ Jain Education International (ख) स्थानांग ५/३/१८४ For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003051
Book TitleSadhwachar ke Sutra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRajnishkumarmuni
PublisherJain Vishva Bharati
Publication Year2011
Total Pages184
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Philosophy
File Size6 MB
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