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________________ साध्वाचार के सूत्र १०. उपघात-निःसृत-किसी का नाश करने के लिए झूठा आरोप लगाया जाता है। प्रश्न ११. सत्यामृषा भाषा क दस भेद कौन-कौन से हैं ? उत्तर-१. उत्पन्न-मिश्रिता-उत्पत्ति की अपेक्षा मिश्रभाषा बोलना। जैसे–'आज सौ बालक पैदा हुए हैं' ऐसा कहना। यदि न्यूनाधिक पिचानवें या एक सौ पांच उत्पन्न हुए हों तो मिश्रभाषा हो जाती है। २. विगत-मिश्रिता-मृतकों की अपेक्षा कहना कि आज सौ आदमी मर . गये। ३. उत्पन्न-विगत-मिश्रिता-जन्म और मरण दोनों के विषय में कहना कि आज इतने जन्मे और इतने मर गये। ४. जीव-मिश्रिता-अधिकांश जीवित शंख आदि का ढेर देखकर यह कहना कि यह जीवों का ढेर है। वहां कई मरे हुए भी हो सकते हैं। ५. अजीव-मिश्रिता-अधिकांश मृतक व कुछ जीवित जीवों का ढेर देखकर यह कहना कि यह मृत जीवों का पिण्ड है। ६. जीवाजीव-मिश्रिता-जीवित एवं मृत जीवों का मिश्रित देर देखकर कहना कि इसमें इतने जीवित एवं इतने मृत हैं। ७. अनन्त-मिश्रिता-अनन्तकाय व प्रत्येक वनस्पति-काय मिश्रित ढेर के लिए यह कहना कि यह अनन्तकाय का दूर है। ८. प्रत्येक-मिश्रिता प्रत्येक वनस्पतिकाय का ढेर, जिसमें अनन्तकाय भी __ मिली हुई हो, प्रत्येक वनस्पति-काय का देर कहना। ९. अद्धामिश्रिता-दिन-रात आदि काल के विषय में मिश्रित भाषा बोलना। दिन निकलने से पहले ही यह कहना-उठो-उठो! सूरज चढ़ गया। १०. अद्धाद्धामिश्रिता-दिन-रात के एक भाग को अद्धाद्धा कहते हैं। अद्धाद्धा के विषय में मिश्रभाषा बोलना। जैसे- जल्दी के कारण दिनरात के प्रथम प्रहर में ही कह देना कि दोपहर हो गया एवं आधी रात बीत गई।' प्रश्न १२. व्यवहार-भाषा के बारह भेद कौन-कौन से हैं?२ उत्तर- १. आमंत्रणी-संबोधन करना, जैसे-हे प्रभो! २. आज्ञापनी-आज्ञा देना, जैसे-अमुक काम करो। १. स्था. १०/६१, प्रज्ञापना पद ११/८६५ २. प्रज्ञापना पद ११/८६६ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003051
Book TitleSadhwachar ke Sutra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRajnishkumarmuni
PublisherJain Vishva Bharati
Publication Year2011
Total Pages184
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Philosophy
File Size6 MB
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