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________________ आशातना प्रकरण प्रश्न ६. तैतीस आशातनाएं कौनसी है? उत्तर-१-५. अर्हत्, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधुओं की आशातना, ६. साध्वियों की आशातना, ७-८. श्रावकों एवं श्राविकाओं की आशातना, ९-१०. देवों और देवियों की आशातना, ११-१२. इहलोक और परलोक की आशातना, १३. केवलीप्रज्ञप्त धर्म की आशातना, १४. देव, मनुष्य और असुरसहित लोक की आशातना, १५. सर्व-प्राणभूत-जीव और सत्त्वों की आशातना, १६. काल की आशातना, १७. श्रुत की आशातना, १८. श्रुत देवता की आशातना, १९. वाचनाचार्य की आशातना, २०. व्याविद्ध-कहीं के अक्षरों को कहीं, २१. व्यत्याम्रडित–उच्चार्यमान पाठ में दूसरे पाठों का मिश्रण करना, २२. हीनाक्षर-अक्षरों का न्यून कर उच्चारण करना। २३. अत्यक्षर-अक्षरों को अधिक कर उच्चारण करना। २४. पदहीन-पदों को कम कर उच्चारण करना। २५. विनयहीन-विराम रहित उच्चारण करना। २६. घोषहीन–उदात्त आदि घोष रहित उच्चारण करना। २७. योगहीन-संबंध रहित उच्चारण करना। २८. सुष्ठुदत्त योग्यता से अधिक ज्ञान देना। २९. दुटु प्रतीच्छित्त-ज्ञान को सम्यक् भाव से ग्रहण न करना। ३०. अकाल में स्वाध्याय करना। ३१. काल में स्वाध्याय न करना। ३२. अस्वाध्याय काल में स्वाध्याय करना। ३३. स्वाध्याय काल में स्वाध्याय न करना। १. समवाओ ३३/१ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003051
Book TitleSadhwachar ke Sutra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRajnishkumarmuni
PublisherJain Vishva Bharati
Publication Year2011
Total Pages184
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Philosophy
File Size6 MB
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