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गणदोघारजगेडएमयणण्यसमाजिहाशदेहियाकाविणियाणण काविसहीवर्ण म. उश्वजवर काविडमंदिराला तातिमसमधिदिवडवराई णरणारहिरिर्पकयकराईपाडियन
सलायङकाश्लोणचामरूजिपडउसजणियमाएगाझमंगलुशवस्ववलसपिहियठकल सचमकुधवल सोसवेणजिसुनिविदारणासचणजडसमहमुग तरुणिहिंगवायबिकयल्यूप
मानो जैसे जिननाथ के घर रतिरंग होने पर कामदेव का सैन्य हो॥११॥
१२ ____ कोई अपने मुख को, कोई सखीजन को, कोई वधूवरों को और कोई घर को सजाती हैं। देवों को इन्द्राणियों और मनुष्यनियों ने कमलकरोंवाले सुन्दर वधू-वरों के ऊपर नमक क्यों उतारा? संजनितमान चामर
भी गिर पड़े। मंगल और धवल गीत गाये जाने लगे। धवल चार कलश रख दिये गये। सूत्र से बँधे हुए वे ऐसे प्रतीत होते हैं कि जैसे निश्रुत (श्रुतरहित - मूर्ख) जड़ के संग को नहीं छोड़ते। तरुणियों के द्वारा उठाकर स्नान कराया गया,
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