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किरणर तामसणणरणाहपुरोहिठ लोठदेवरवसग्नेहिल एपदोपडिविहाणलड़कित
राजा का परोहित तब कहता है-“हे देव, लोक उपसर्ग से अवरुद्ध है. इसका कोई प्रतिविधान करना चाहिए
पानी का निवारण करनेवाले चर्मरल की चिन्ता की जाये।"
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