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________________ पढमु सुमंगल - देविहि दुद्धरु बाहुबलिउ' बाहुबलि सुनंदहि राणी पुणु पसवेइ सुमंगल अट्ठाणवई पवर तणुब्भव दस- दुगुणा लक्खह तेसट्ठि ति अग्गल पालिवि पुग्वह पुणु कय- मंगल [ ३ ] स-सुवन्न- दंड वर -छत्त- पंति पुणु मारु सुणिज्जइ सारिवट्टि अवलोयहि मुणिवर परहं दारु वर-तरुणि-जगह मज्झ - प्पएसि उग्गाहहिं निवइन बिउण- दाणि छलु आणहि नो पुणु लोभिताहं इय नीइ पयट्टहिं दंड-भूय अथ अस्थि- तित्थु कोइ तिणि दाण - मणोर विहल होइ संधिकाव्य-समुच्चय बंभी - जुयलि जाउ भरहे सरु सुंदरि जुयलि जाउ जस-कंदहि सील - समुज्जल कय-जय-मंगल अउणापन्न- जुयल अपुणुब्भव घत्ता जहि केवल बज्झइ मत्त दंति निवडंति पास जूयार-हट्टि निसुणिज्जइ वेसहं केस - भारु दारिद्द - मुद्द दीसे " देसि दिनहु करहिं काणि संतु वि अवजाणहि घणि जणाहं हक्कार-मक्कार- धिक्कार-रूव B Jain Education International रिसहु महा- महिनाहु तियासी लोगंतिय- देवहिं विन्नत्तउ .11 घत्ता इय जणु तोसेविणु रज्जु करेविणु सिरि- नाहि-तणुब्भवु गय-भव-संभवु कुमर-वासु लीला - लडहु रज्ज - लच्छि पालेइ पहु पुव्व-लक्ख - तेसट्ठि पहु संजम - रज्जु महेइ 10 लहु [ ४ ] अच्छिवि पुव्व - लक्ख घरवासी दाणु देइ वारिसिउ निरुत्तउ 5 For Private & Personal Use Only ।३ ४ ॥२ 1१ १२ ३ ॥४ ॥३ 1. P बाहुबलि 2. P वइ जणेइ तणु० 3. L लखह 4. L छत्त वर दंड 5. L सारवडि 6. L अवलोहि P अह लोयहिं मुणि पर 7. L दीसइ न 8. P संभु 9. L धणु आणहि 10. P महेलइ 11. L देविहि १ www.jainelibrary.org
SR No.002656
Book TitleSamdhikavya Samucchaya
Original Sutra AuthorN/A
AuthorR M Shah
PublisherL D Indology Ahmedabad
Publication Year1980
Total Pages162
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Literature
File Size7 MB
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