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________________ २४५ २०५ २४६ २१० २१३ २१६ t. २६६ २६ कलुषध्यानम् : बाहु-सुबाहु-पीठ-महापीठाः २०३ | ४४ परुषध्यानम् : ब्रह्मदत्तः २४२ २६ कलुषध्यानम् : सिंहगुहास्थितक्षपकः २०३ ४४ परुषध्यानम् : युगबाहुः २४२ २७ कलहध्यानम् : दुर्योधनः २०४ ४४ परुषध्यानम् : एकाश्राविका २७ कलहध्यानम् : नारदः ४५ भयध्यानम् : गजसुकुमालमुनिः २४६ २८ युद्धध्यानम् : कोणिकनृपः २०५ ४६ रूपध्यानम् : सनत्कुमारः २८ युद्धध्यानम् : चण्डप्रद्योतः ४६ रूपध्यानम् : चण्डप्रद्योतः २४६ २९ नियुद्धध्यानम् : बाहुबली-भरतौ ४७ आत्मप्रशंसाध्यानम् : वररुचिः २४७ २९ नियुद्धध्यानम् : अट्टनमल्लः ४७ आत्मप्रशंसाध्यानम् : रथिकः कोशा च २५१ ३० सङ्गध्यानम् : राजीमती २१४ | ४८ परनिन्दाध्यानम् : कूरगडुकमुनिः २५२ ३० सङ्गध्यानम् : भवदेवमुनिः ४९ परगर्हाध्यानम् : गोष्ठामाहिलः २५५ ३१ सङ्ग्रहध्यानम् : मम्मणः ५० परिग्रहध्यानम् : चारुदत्तः २६० ३२ व्यवहारध्यानम् : सार्थवाहपत्नी ५० परिग्रहध्यानम् : मुनिपतिमुनिः ३३ क्रयविक्रयध्यानम् : नन्दः ५१ परपरिवादध्यानम् : सुभद्रासती २६१ ३४ अनर्थदण्डध्यानम् : शाम्बः | ५२ परदूषणध्यानम् : अङ्गऋषिः २६६ ३४ अनर्थदण्डध्यानम् : गङ्गदत्तः २२२ ५३ आरम्भध्यानम् : कुरुडोत्कुरुडौ २६६ ३४ अनर्थदण्डध्यानम् : वाचाल: २६६ |५३ आरम्भध्यानम् : द्वीपायनः २६६ ३५ आभोगध्यानम् : ब्रह्मदत्त: २२३ ३६ अनाभोगध्यानम् : प्रसन्नचन्द्रः | ५४ संरम्भध्यानम् : क्षुल्लकमुनिः २७० २२४ ३७ ऋणाविलध्यानम् : यतिभगिनी | ५५ पापानुमोदनध्यानम् : -राजा ३८ वैरध्यानम् : परशुरामः | ५६ अधिकरणध्यानम् : नन्दमणिकार: २७१ ३८ वैरध्यानम् : कपिलः (कृषिवल:?) २२८ | ५७ असमाधिमरणध्यानम् : स्कन्दकाचार्यः २७३ ३८ वैरध्यानम् : सुदर्शनः | ५८ कर्मोदयप्रत्ययध्यानम् : विष्णुः(कृष्णः)२७६ ३९ वितर्कध्यानम् : चाणक्यः ५९ ऋद्धिगौरवध्यानम् दशार्णभद्रः २७८ ४० हिंसाध्यानम् : कालसौकरिकः २३३ ६० रसगौरवध्यानम् : जितशत्रुराजा २८१ ४१ हासध्यानम् : चण्डरुद्राचार्यः ६१ सातागौरवध्यानम् : शशिराज ४१ हासध्यानम् : वज्रबाहुः २३७ | ६२ अविरमणध्यानम् : भृगुयशसौ २८२ ४२ प्रहासध्यानम् : चण्डप्रद्योतः २४६ ६२ अविरमणध्यानम् : मूकजीवः ४३ प्रद्वेषध्यानम : मरुभूति-कमठौ २३८ | ६२ अविरमणध्यानम् : मेतार्यमुनिः २८३ ४३ प्रद्वेषध्यानम् : वीरविभुः गोपश्च २३८ / ६३ अमुक्तिमरणध्यानम् : सम्भूतिमुनिः १९१ २२६ २२७ २२९ २३० २३५ ' Jain Education International 2010_02 For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.002562
Book TitleAgam 25 Prakirnak 02 Atur Pratyakhyan Sutra
Original Sutra AuthorVeerbhadra Gani
AuthorKirtiyashsuri
PublisherSanmarg Prakashan
Publication Year2010
Total Pages400
LanguagePrakrit, Sanskrit, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, F000, & F020
File Size11 MB
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