SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 136
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ १०५ १६३ ११२ ११७ ११७ १२४ खण्ड:-२ प्रकीर्णकोक्तदुर्ध्यानाऽन्तर्गतदृष्टान्तसमुच्चयाऽनुक्रमः १ अज्ञानध्यानम् : अशकटापिता ९७ / १२ मिथ्याध्यानम् : गोविन्दः १५३ २ अनाचारध्यानम् : कोङ्कणसाधुः ९८ | १३ मूर्छाध्यानम् : कनकध्वजः १५४ २ अनाचारध्यानम् : आषाढाचार्यः ९८ १४ शंकाध्यानम् : आषाढाचार्यशिष्याः ९८ ३ कुदर्शनध्यानम् : सुराष्ट्रश्रावकः | १५ काङ्क्षाध्यानम् : मरिचिः ४ क्रोधध्यानम् : कूलवालकमुनिः १०७ | १६ गृद्धिध्यानम् : मङ्गुसूरिः १६४ ४ क्रोधध्यानम् : गोशालकः १६ गृद्धिध्यानम् : कण्डरीकः १६५ ४ क्रोधध्यानम् : पालकः | १७ आशाध्यानम् : मूलदेवः १६६ ४ क्रोधध्यानम् : नमुचिमंत्री १८ तृष्णाध्यानम् : क्षुक्कलमुनिः १७४ ४ क्रोधध्यानम् : शिवभूतिः १२१ | १९ क्षुद्रध्यानम् : राजगृहद्रमकः १७६ ५ मानध्यानम् : बाहुबली २० पथिध्यानम् : वल्कलचीरी १७६ ५ मानध्यानम् : विश्वभूतिः १२५ २१ प्रस्थानध्यानम् : सनत्कुमारः १८० ५ मानध्यानम् : सुभूमचक्री | २१ प्रस्थानध्यानम् : ब्रह्मदत्तः ५ मानध्यानम् : परशुरामः १२६ | २२ निद्राध्यानम् : महिषमांसभक्षिः १८४ ५ मानध्यानम् : सङ्गमः २२ निद्राध्यानम् : मोदकाभिलाषी १८४ ६ माया ध्यानम् : धनश्री १३६ २२ निद्राध्यानम् : हस्तिदन्तोत्पाटकारी १८५ ७ लोभध्यानम् : वणिमित्र १३८ | २२ निद्राध्यानम् : साधुमस्तकत्रोटी १८५ ७ लोभध्यानम् : सिंहकेसरिसाधुः १३८ | २२ निद्राध्यानम् : वटशाखाभञ्जी १८५ ८ रागध्यानम् : विक्रमयशोराजः १४१ | २३ निदानध्यानम् : नन्दिषेण: ८ रागध्यानम् : दामन्नकश्वसुरः १४२ | २३ निदानध्यानम् : गङ्गदत्तः १८७ ८ रागध्यानम् : कपिल: | २३ निदानध्यानम् : सम्भूतिमुनिः १९१ ९ द्वेषध्यानम् : मधुदेव-पिप्पलादौ १४५ | २३ निदानध्यानम् : द्रौपदी १९४ ९ द्वेषध्यानम् : धर्मरुचि-नाविको | २४ स्नेहध्यानम् : मरुदेवीमाता ९ द्वेषध्यानम् : वीरकदेवः १४७ २४ स्नेहध्यानम् : सुनन्दा १९९ १० मोहध्यानम् : बलभद्रः १४७ | २४ स्नेहध्यानम् : अर्हन्नकमाता २०० ११ इच्छाध्यानम् : कपिलः १५० | २५ कामध्यानम् : कुमारनन्दिसुवर्णकार:२०१ १२ मिथ्याध्यानम् : जमालिः १५१ । २५ कामध्यानम् : रावणः २०२ १२६ १३० १८५ १४३ १४५ _Jain Education International 2010_02 For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.002562
Book TitleAgam 25 Prakirnak 02 Atur Pratyakhyan Sutra
Original Sutra AuthorVeerbhadra Gani
AuthorKirtiyashsuri
PublisherSanmarg Prakashan
Publication Year2010
Total Pages400
LanguagePrakrit, Sanskrit, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, F000, & F020
File Size11 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy