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________________ २७८] सयम्भुकिउ पउमचरिउ [क०३,४-८, ४, १-९,५,१-५ णिविसु वि सहेवि ण सक्कमि राहव दे 'साइउ णिव्बूढ-महाहव ॥४ पिय-महुरालावहिं सम्माणहि किं तवेण महु जोवणु-माणहि ॥५ णिच्चलु पाहाणु व किं अच्छहि सवडम्मुहु स-विआरु णियच्छहि ॥ ६ लइउ पिसाएं जेम अलजिउ कालु म खेवहि वत्थ-विवजिउ ॥ ७ ॥ घत्ता ॥ . सो लोयाहाणउ एह सच्चउ पइँ कियउ.. सुन्दरु णन्दन्तउ जेम 'जो णिय-णिग्गयउ ॥८ [४] हउँ सा सीय तुहुँ जें सो रहुवइ एह जे पिहिमि ते जि इय णरवइ ॥१ 10 सा जि अउज्झा-णयरि पसिद्धी धण-कण-जण-मणि-रयण-समिद्धी ॥२ राउलु तं जें ते जि हय-गय-वर पुप्फ-विमाणु तं जें ते रहवर ॥ ३ एउ मइ-पमुह सव्वु अन्तेउरु अवइण्णउ मयरथ णं पुरु॥४ भुञ्जहि काम-भोय हियइच्छिय छैडहि 'लच्छीहर-दुक्खु च्चिय ॥५ . अण्णु वि 'पउम होन्ति अइ-दूसह चउ कसाय वावीस परीसह ॥ ६ । 15 पञ्च वि इन्दिय सत्त महब्भय को विसहइ पुणु अट्ठ महा-मय ॥ ७ जिण-तवचरणु जाइ कहाँ छेयहाँ भज्जेवउ कालेण वि एयहाँ ।। ८ ॥ घत्ता ॥ तो वरि एवहिँ जे ण लग्गु हासउ दिणेहिँ पर । सञ्जम-भण्डणें पइसेवि भग्ग अणेय णर ॥ ९ [५] महु कारण पइँ आसि चडन्तइँ चावइँ सायर-वजावत्तइँ ॥१ मह कारणे साहसगइ मारिउ किक्किन्धेसरुणिरु उवयारिउ ॥२ महु कारणे मारुइ पट्टवियउ तें वज्जाउहु रण णिद्ववियउ॥३ मह कारणे कोडि-सिलुच्चाइय अण्णु वि आसाली विणिवाइय ॥४ 15 महु कारण भग्गउ णन्दण-वणु घाइउ अक्ख-कुमारु स-साहणु ॥ ५ . 2 The portion from जेम up to जेम ( line 8 c ) is omitted in A. 3 Pउं. -4 PS A णिए. 4. 1 P A °उं. 2 P छं'. 3 P चिय, s विय, A च्छिय. 4 P S A °हि. 5 PS A° णि. [३] १ आलिङ्गनम्. २ तदत्र कथा । दक्षिणापथे गिरिकूटग्रामे प्रधानपुत्रः (T पटकिलस्य पुत्रः) सुंदरनामा । स चिरपत्नी परित्यज्य निज-मामपुत्री-निमित्ते वृक्षशाखामालम्ब्य मृतस्तथा त्वमप्युभयभ्रष्टो भविष्यसीति. ३ निजेभ्यो निर्गतः. .. [४] १ लक्ष्मणदुःखम्. २ ' हे राम. ३ प्रमाणं कस्य जातः. ४ संग्रामे. Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.002525
Book TitlePaumchariu Part 3
Original Sutra AuthorSwayambhudev
AuthorH C Bhayani
PublisherZZZ Unknown
Publication Year1960
Total Pages388
LanguageSanskrit, English
ClassificationBook_Devnagari & Literature
File Size19 MB
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