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________________ १२०] सयम्भुकिउ पउमचारउ [35०८, १-११,९,१-८ [८] सन्ति-जिनालए भामरि देप्पिणु । सन्ति-जिणेन्दहोणवण करेप्पिणु ॥ १ पासु दसासहो ढुक्क कइद्धय णाई मइन्दहो मत्त महागय ॥२ उद्दालेंवि हत्यहाँ अक्ख-सुत्तु दससिरु सुग्गीव-सुएण वुत्तु ॥ ३ 'ऍह का राय आढत्तु डम्भु थिउ णिच्चलु णं पाहाण-खम्भु ॥४ तउ कवण धीरु को वाऽहिमाणु सा कवण विज इउ कवण झाणु ॥५ उप्पाइय लोयहुँ काइँ भन्ति पर-गारि लयन्तहों कवण सन्ति ॥ ६ 10 किं भाणुकण्ण-इन्दइ-दुहेण णउ वोल्लहि एक्केण वि मुहेण ॥ ७ किं लक्खण-रामहुँ ओसरेवि थिउ सन्तिहें भवणु पईसरेंवि' ॥ ८ णिब्भच्छेवि एम कइद्धएहिँ महएविउ वेहाविद्धएहिँ ।.९ आढत्त वन्धहुँ धरहुँ लेहुँ विच्छारहुँ दारहुँ हणहुँ णेहुँ ॥ १० ॥ घत्ता ॥ तहाँ अन्तेउरहों भउ उप्पण्णु भडेहिँ भिडन्तेहि । णं णलिणी-वणहों मत्त-गइन्दहिँ सरु पइसन्तेंहिँ ॥ ११ का वि वरङ्गण कड्डिय थाणहो। कुसुम-लया इव वर'-उजाणहो ॥१ सामल-देहिय हार-पयासिरि। स-वलायावलि णं पाउस-सिरि ॥२ के वि कड्डिय णेउर-चलवलन्ति सरवर-लच्छि व कमल-क्खलन्तिं ॥ ३ कवि कविय रसणा-दाम लेवि सु-णिहि व्व भुअङ्गमु वसिकरेवि ॥४ कवि कड्डिय तिवलिउ दक्खवन्ति कामाउरि-परिहउ पायडन्ति ॥ ५ कवि कड्डिय भजण-भयहाँ जन्ति किस-रोमावलि-खम्भुद्धरन्ति ॥ ६ कवि कड्डिय थण-यलसुबहन्ति लायण्ण-वारि-पूरे व तरन्ति ॥ ७ कवि कड्डिय कर-कमलइँ धुणन्ति छप्पय-रिञ्छोलि वं मुच्छलन्ति(१) ॥ ८ M 8. 1 PS A णाइ. 2 Ps का वि. 3 8 °हु, A °हुं. 4 P आढत्तहुं, 5 आढत्तहु. 5 PS हु, A हो. 6 P S णेहु, A लेहुं. 7 PA वणेहि, s वणेहि. 9. 1 P S लय. 2 PS के. 3 P S A कमलइ. 4 P उ, यउ. [९] १ ' वलाकापति. २ सुनिधीव (? धिरिव ). ३ ' खातिका. ४ ' उद्वहन्ता. Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.002525
Book TitlePaumchariu Part 3
Original Sutra AuthorSwayambhudev
AuthorH C Bhayani
PublisherZZZ Unknown
Publication Year1960
Total Pages388
LanguageSanskrit, English
ClassificationBook_Devnagari & Literature
File Size19 MB
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