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________________ तीर्थंकर : एक अनुशीलन @ 187 उत्सेधांगुल देह प्रमाण (33) | 500 धनुष |450 धनुष 400 धनुष 350 धनुष 300 धनुष 250 धनुष Krir tvoro di asso प्रमाणागुंल देह वैवाहिक प्रमुख पत्नी प्रमाण (34) स्थिति (35) | (36) 120 प्रमाणांगुल विवाहित सुनन्दा, सुमंगला 108 प्रमाणांगुल 96 प्रमाणांगुल 84 प्रमाणांगुल 72 प्रमाणांगुल 60 प्रमाणांगुल 48 प्रमाणांगुल सोमा 36 प्रमाणांगुल 24 प्रमाणांगुल 21 अंगुल 30 अंश 19 अंगुल 10 अंश 16 अंगुल 40 अंश 14 अंगुल 20 अंश 12 प्रमाणांगुल 10 अंगुल 40 अंश 9 अंगुल 30 अंश यशोमती, विजया 8 अंगुल 20 अंश कृष्णा 7 अंगुल 10 अंश 6 प्रमाणांगुल अविवाहित अविवाहित 4 अंगुल 40 अंश | विवाहित 3 अंगुल 30 अंश| " 2 अंगुल 20 अंश अविवाहित | अविवाहित 27 अंश प्रमाण । विवाहित प्रभावती 21 अंश प्रमाण विवाहित | यशोदा 40 धनुष धनुष शूरश्री ciats i en 25 धनुष 20 धनुष 15 धनुष 10 धनुष 9 हाथ 7 हाथ 24. विशेष : अंगुल के 3 भेद हैं- आत्मांगुल यानी जिस काल में जो मनुष्य होते हैं, उनके अपने अंगुल, उत्सेधांगुल यानी 8 यवमध्य जिससे मनुष्य, नारकी, देवता की अवगाहना नापी जाती है एवं प्रमाणांगुल जो सबसे बड़ा होता है।
SR No.002463
Book TitleTirthankar Ek Anushilan
Original Sutra AuthorN/A
AuthorPurnapragnashreeji, Himanshu Jain
PublisherPurnapragnashreeji, Himanshu Jain
Publication Year2016
Total Pages266
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size24 MB
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