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________________ वायु से मृत्यु का काल ज्ञान योगशास्त्र पंचम प्रकाश श्लोक १०३ से ११२ इसका विवरण आगे स्वयं स्पष्ट करते हैं।५६५। प्रवहत्येकनासायां, षोडशाहानि मारुते । जीवेत्सहाष्टचत्वारिंशतं दिनशतत्रयीम् ।।१०३॥ अर्थ :- लगातार सोलह दिन तक पिंगला या किसी एक नासिका में पवन चलता रहे तो ३६० दिनों में से एक ... बारह कम अर्थात् ३६०-१२=३४८ दिन तक वह जीवित रहता है ।।१०३।। ५६६। वहमाने तया सप्तदशाहानि समीरणे । अह्रां शतत्रये मृत्युश्चतुर्विंशतिसञ्युते ॥१०४।। अर्थ :- उसी तरह १७ दिन तक एक ही नाड़ी में वायु चलता रहे तो ३४८ दिनों में दो बारह-२४ कम ३४८ ____२४=३२४ दिन में मृत्यु होती है ।।१०४।। तथा१५६७। पवने विचरत्यष्टादशाहानि तथैव च । नाशोऽष्टाशीतिसंयुक्ते, गते दिनशतद्वये ॥१०५।। अर्थ :- इसी प्रकार अठारह दिन तक पवन चलता रहे तो ३२४ दिनों में से तीन बारह ३६ कम ३२४-३६२८८ ___दिन में मृत्यु होती है ।।१०५।। तथा१५६८। विचरत्यनिले तद्वद् दिनान्येकोनविंशतिम् । चत्वारिंशद्युते याते, मृत्युदिनशतद्वये ॥१०६।। अर्थ :- पूर्ववत् उन्नीस दिन वायु चलता रहे तो २८८ दिनों में से चार बारह=४८ कम २८८-४८=२४० दिन में | उसकी मृत्यु होती है ॥१०६।। १५६९। विंशति-दिवसानेकनासाचारिणि मारुते । साशीतौ वासरशते, गते मृत्युर्न संशयः ॥१०७॥ अर्थ :- यदि बीस दिन तक एक ही नाड़ी में पवन चलता रहे तो २४० दिनों में से पांच बारह-६० कम अर्थात् २४०-६०=१८० दिन में निश्चित रूप से मृत्यु होती है ।।१०७।। ।।५७०। एक-द्वि-त्रि-चतुः-पञ्च-दिन-षट्क-क्रमक्षयात् । एकविंशादिपञ्चाहान्यत्र शोध्यानि तद् यथा।।१०८।। अर्थ :- इक्कीस से लेकर पच्चीस दिन तक सूर्यनाड़ी में ही पवन बहता रहे तो पूर्वोक्त १८० दिनों में ही से क्रमशः एक, दो, तीन, चार और पांच षट्क कम करते जाना चाहिए ॥१०८।। इसका स्पष्टीकरण करते हैं१५७१। एकविंशत्यहं त्वर्कनाडीवाहिनि मारुते । चतुःसप्ततिसंयुक्ते, मृत्युदिनशते भवेत् ॥१०९।। अर्थ :- पूर्वोक्त पौष्णकाल में यदि इक्कीस दिन तक सूर्यनाड़ी में पवन चलता रहे तो १८० दिनों में से एक षट्क कम यानी १८०-६=१७४ दिन में उसकी मृत्यु होती है। ।५७२। द्वाविंशतिदिनान्येवं, स द्विषष्ठावहःशते । षड्दिनोनैः पञ्चमासैस्त्रयोविंशत्यहानुगे ॥११०॥ अर्थ :- इसी प्रकार बाईस दिन तक पूर्ववत् पवन चले तो १७४ दिनों में से दो षट्क=१२ दिन कम यानी १६२ दिन तक जीवित रहेगा और तेईस दिन तक उसी प्रकार पवन चले तो १६२ दिनों में से तीन षट्क अर्थात् अठारह दिन कम करने से छह दिन कम पांच महिने में अर्थात् १६२-१८१४४ दिनों में मृत्यु होती है ॥११०।। तथा।५७३। तथैव वायौ वहति, चतुर्विंशतिवासरीम् । विंशत्यभ्यधिके मृत्युभवेद् दिनशते गते ॥१११।। अर्थ :- यदि चौबीस दिन तक वायु एक ही नाड़ी में बहता रहे तो १४४ दिनों में से चार षट्क कम अर्थात् १४४ २४=१२० दिन बीतने पर मृत्यु हो जाती है ।।१११।। ५७४। पञ्चविंशत्यहं चैवं, वायौ मासत्रये मृतिः । मासद्वये पुनर्मृत्युः, षड्विंशतिदिनानुगे ॥११२॥ अर्थ :- पच्चीस दिन तक वायु चलता रहे तो १२० दिनों में से पांच षट्क-३० दिन कम=९० दिन-(तीन महीने) में और छब्बीस दिन तक वायु चलता रहे तो दो महीने में मृत्यु होती है।।११२।। तथा 407
SR No.002418
Book TitleYogshastra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJayanandvijay
PublisherLehar Kundan Group
Publication Year
Total Pages494
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size24 MB
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