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________________ ९३८ मोगरा (व्य ) दिक्कुमारी देवी ५।२२७ भूमि (भी) वह भूमि - जहाँ कल्पवृक्षोंसे १० प्रकारके भोग प्राप्त होते हैं २७७ भोगमालिनी (व्य) दिक्कुमारी देवी ५।२२७ मोगवती (व्य) दिक्कुमारी देवी ५।२२७ भोगवती (व्य) माकन्दीके राजा द्रुपदकी स्त्री ४५ । १२१ भोगवर्धन ( भी ) देशका नाम ११1७० भोज ( व्य ) कृष्णका पक्षपाती एक राजा ५२।१५ भोजकवृष्णि (व्य) यदुवंशी मथुरा के राजा सुवीरका पुत्र १८ १० भोजनाङ्ग = एक कल्पवृक्ष राजीमती ७१८० भोजसुता (व्य) ५५/७२ भौम = व्यन्तर देव ३|१६२ भौम = १८।७० भौम (IT) अष्टांग निमित्त ज्ञानका एक अंग १०।११७ भौमाय (पा) आग्रायणी पूर्व पृथिवीकायिक जीव की वस्तु १०१७९ भ्रकुंश = नटवेषधारी नपुंसक ५४।४८ भ्रम (भौ ) धूमप्रभा पृथिवीके द्वितीय प्रस्तारका इन्द्रक ४।१३९ भ्रमरघोष (व्य) कुरुवंशका एक राजा ४५।१४ भ्रान्त (भी) रत्नप्रभा पृथिवीके चतुर्थ प्रस्तारका इन्द्रक ४।७६ Jain Education International हरिवंशपुराणे [ म ] मकरध्वज (व्य) प्रद्युम्न५५१३१ मकराकर = समुद्र ४१४ मगध ( भी ) देशका नाम ( बिहारका एक भाग ) ४३।९९ मगधासार नलक (भी) वि. द. नगरी २२।९९ मगधेश्वर (व्य) राजा श्रेणिक ५०१२ मघवान् (व्य) तीसरा चक्रवर्ती ६०।२८६ मघवी (भौ ) तमः प्रभाका रूढ़ि नाम ४।४६ मङ्गल कूट ( भी ) सौमनस्य पर्वतका एक कूट ५।२२१ मङ्गला = एक विद्या २२|७० मङ्गलावती ( भी ) घातकी खण्ड पूर्वविदेहका एक देश ६०१५७ मङ्गलावती ( भी ) पूर्वविदेहका एक देश ५।२४७ मङ्गी (व्य ) विमलचन्द्र राजाकी विमला रानीसे उत्पन्न पुत्रो जो वज्रमुष्टिको दो गयी ३३।१०४ मङ्गो (व्य) एक भोलनी २७।१०७ मन्जूषा (भी) विदेहकी नगरी ५।२५७ मज्जोदरी (व्य) एक कलालिन जिसके यहाँ कंस पला ३३।१५ मटम्ब (पा) पाँच सौ गाँवोंसे घिरा नगर २।३ मणिकाञ्चन = विजयार्धकी एक गुहा ४२११८ मणिकाञ्चन ( भो) वि. उ. नगरी २२८९ For Private & Personal Use Only मणिकाञ्चनकूट (भौ) शिखरि - कुलाचलका ग्यारहवाँ कूट ५।१०७ मणिकाञ्चनकूट (भौ) रुक्मि - कुलाचलका आठवाँ कूट ५।१०४ मणिचूल - हिमचूल ( व्य ) चित्रचूल और मनोहरी के युगल पुत्र ३३।१३३ मणिचूल (व्य) विनमिका पुत्र २२।१०४ मणिप्रम (भौ ) वि. द. नगरी २२।९६ मणिप्रम (भौ) रुचिक गिरिका नैर्ऋत्य दिशासम्बन्धी कूट ५।७२३ मणि मणिप्रभ (भौ) कुण्डलगिरिके पश्चिम दिशासम्बन्धी कूट ५।६९३ मणिभद्र ( भो ) विजयार्धका छठा कूट ५।२७ मणिभद्र (व्य ) अयोध्या के सेठ छोटा पुत्र समुद्रदत्तका ४३।१४९ मणिभद्रकूट ( भी ) ऐरावतके विजयार्धका चौथा कूट ५।११० मणिवज्र ( भो) वि. उ. नगरी २२८८ मण्डित ( भी ) वि. द. नगरी २२।९३ मण्डूक (भी) एक गाँव ६०।३३ मण्डूको (व्य) एक धीवरी ६० ३२ मतङ्गज (व्य) वसुदेव और नील यशाका पुत्र ४८।५७ मत्तजला (भी) विदेहक्षेत्रकी एक विभंगा नदी ५।२४० www.jainelibrary.org
SR No.001271
Book TitleHarivanshpuran
Original Sutra AuthorJinsenacharya
AuthorPannalal Jain
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year2003
Total Pages1017
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Literature, & Story
File Size26 MB
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