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________________ शब्दानुक्रमणिका ९३९ मत्सरीकृता = षड्जस्वरकी मुर्छना १९।१६१ मत्स्य (नौ) देशका नाम ११।६५ मरण (भौ) देशविशेष ३।४ मत्स्य (व्य) राजा महीदत्तका पुत्र १७१२९ मथुरा = यमुनातटपर स्थित प्रसिन्द नगरी १७।१६२ मथुरा (व्य) दक्षिणसमुद्र तटपर पाण्डवोंके द्वारा बसायी हुई एक नगरी ५४।७३ मदन (व्य) कृष्णका पुत्र प्रद्युम्न ५५।१७ मदनवेगा (व्य) एक कन्या जो वसुदेवको विवाही गयी २४१८४ मद्यवान् व्य) जरासन्धका पुत्र ५२।३६ मद्या = एक कल्पवृक्ष ७८० मदन = प्रद्युम्न ४३।२४४ मद्रक (भी) देशका नाम ११।६६ मद्रकार (भौ) देशका नाम १११६४ मद्री(व्य) अन्धकवृष्णिको पुत्री, पाण्डुको स्त्री १८।१५ मधु (व्य) हेमनाभ और धरा वतीका पुत्र ४३।१६९ मधु = वसन्त ऋतु ५५।२९ मधुकैटभ (व्य) पाँचवाँ प्रति नारायण ६०.२९१ मधुपिझल (व्य) राजा तृण बिन्दु और सर्वयशाका पुत्र २३।५२ मधुरा (व्य) वर्धकि गाँवके मृगा यण ब्राह्मणकी स्त्री २७१६२ मध्य देश (भौ) मध्यवर्ती देश ३११ मध्यम = एक स्वर १९।१५३ मध्य मध्यम (व्य) वारुणीवर समुद्रके रक्षक देव ५१६४१ मध्यमपद (पा) सोलह सौ चौंतीस करोड़ तेरासी लाख सात हजार आठ सौ अठासी अक्षरोंका एक मध्यम पद होता है १०।२४ मध्यमपात्र (पा) संयतासंयत श्रावक ७।१०९ मध्यमामध्यम ग्रामके आश्रित जाति १९।१७६ मध्यम शातकुम्म = व्रतविशेष ३४।८७ मध्यम सिंह निष्क्रीडित = एक उपवासवत ३४।७९ मध्यमोदीच्यवा-मध्यम ग्रामके आश्रित जाति १९।१७७ मध्यलोक स्तूप (पा)समवसरणके स्तूप ५७१९७ मनक (भौ) शर्कराप्रभा पृथिवी के तृतीय प्रस्तारका इन्द्रक विल ४।१०७ मनःपर्यथ (व्य) दूसरेके मनकी बातको जाननेवाला ज्ञान विशेष २।५६ मन शिलद्वीप (भौ) अन्तिम सोलह द्वीपोंमें पहला द्वीप ५।६२२ मनु - कुलकर ८।१ मनु = अदिति देवीके द्वारा विद्याओंका एक निकाय २२।५७ मन ( भौ) वि. उ. नगरी २२१८८ मनुपुत्रक = विद्याधर जाति २६।९ मनोगति (व्य) सूर्याभ और धारिणीका पुत्र ३४।१७ मनोमव (व्य) रुद्र ६०५७१ मनोभू = काम १७७ मनोरमा (व्य) अमितगति विद्यागरकी स्त्री २१।१२० मनोरमा (व्य) मेघपुरके राजा पवनवेग और मनोहरी रानीकी पुत्री, वनमालाका जीव १५।२७ मनोहरी (व्य) चित्रचूलकी स्त्री ३३११३२ मनोहरी (व्य) मेघपुरके राजा पवनवेगकी स्त्री १५।२६ मनोहरी (व्य) राजा दक्ष और __ इलाकी पुत्री १७१३ मन्दर (भौ) मेरुपर्वत ४।११ मन्दरस्तूप (पा) समवसरणके स्तूप ५७१९८ मन्दर (व्य) मथुराके राजा रत्नवीर्यकी अमितप्रभा रानीसे उत्पन्न पुत्र, धर णेन्द्रका जीव २७।१३५ मन्दर (व्य) जरासन्धका पुत्र ५२।३५ मन्दर (व्य) कुरुवंशका एक राजा ४५.११ मन्दर (भो) नन्दनवनका एक कूट ५।३२९ मन्दर(भौ) रुचिकगिरिकादक्षिण दिशासम्बन्धी कूट ५।७०८ मन्दोदरी (व्य) राजा सगरकी प्रतीहारी २३३५० मय (व्य) समुद्र विजयका पुत्र ४८.४४ मयूरग्रीव (व्य) आगामी प्रति नारायण ६०५७० मरकत =हरे रंगका मणि२।१० मरीचि (व्य) सत्यभामाके भवा न्तर वर्णनमें उल्लिखित एक ब्राह्मण ६०।११ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.001271
Book TitleHarivanshpuran
Original Sutra AuthorJinsenacharya
AuthorPannalal Jain
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year2003
Total Pages1017
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Literature, & Story
File Size26 MB
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