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________________ शब्दानुक्रमणिका ९३७ भानु (व्य) मथुराका एक सेठ ३३।९६ भानु (व्य) कंसकी स्त्री जीवद्यशाका भाई ३५।७५ भानु (व्य) कृष्णका पुत्र ४८०६९ भानु (व्य) भानुकुमार नामका श्रीकृष्णका पुत्र १११०० भानु (व्य) लब्धाभिमानका पुत्र १८।३ मानुकीर्ति (व्य) मथुराके भानु और मथुराका पुत्र ३३९७ भानुदत्त (व्य) चम्पा नगरीका एक सेठ, चारुदत्तका पिता २११६ भानुमालिनी (व्य) समवसरणके आम्रवनकी वापिका ५७१३५ मानुषेण (व्य) मथुराके भानु और यमुनाका पुत्र ३३३९७ मामा (व्य) सत्यभामा ४३।३ भार्गव ( भौ) देशका नाम भाषासमिति (पा) धर्मकार्यों में हित-मित प्रिय वचन बोलना २०१२३ भाषासमितिव्रत = व्रतविशेष ३४।१०७ भासा (पा) समवसरणके आम्र वनको वापिका ५७१३५ भास्कर (व्य) जरासन्धका पुत्र ५२।३८ मास्वती (पा) समवसरणके आम्रवनको वापिका ५७।३५ भीम (व्य) सुभानुका पुत्र१८।३ भीम (व्य) मध्यम पाण्डव ५०७८ मीम (व्य) कृष्णका पुत्र४८।६९ मोम (व्य) पहला नारद ६०१५४८ भीमक (प) एक उदाड राजा ४३।१६२ भीमसेन( व्य) पाण्डव ४५।२ भीरु ( भौ) देशविशेष ३५ भीष्म ( व्य) राजा शन्तनके वंशमें राजा रुक्मण और रानी गंगासे उत्पन्न पुत्र ४५१३५ भीष्म (व्य) रुक्मिणीका पिता ६०१३९ भीष्मज= भीष्मके पुत्र, रुक्मी ४२।९३ मोष्जा = रुक्मिणी ६०॥४१ भुजगवरद्वीप (भी) चौदहवाँ द्वीप ५।६१९ भुजगवरसागर (व्य) चौदहवाँ सागर ५।६१९ भुजबली (व्य) सुबलका पुत्र १३३१७ भुजिष्य =सेवक १११७८ भुजिष्या = दासी ४०।३९ भूतरमण (भौ) मेरुका एक वन ५।३०७ भूतरमण (भौ) एक अटवी २७१११९ भूतथर (नौ) अन्तिम सोलह द्वीपोंमें बारहवाँ द्वीप ५।६२५ भृतारण्य ( भौ) विदेहक्षेत्रमें स्थित वनविशेष ५।२८१ भूति (व्य)भगवान् ऋषभदेवका गणधर १२१५९ भूभृत् = पर्वत ३१६० भूमिकुण्डल कूट (भौ) वि. द. नगरी २२।१०० भूमिलुण्ड=अदिति देवीके द्वारा दत्त विद्याओंका एक निकाय २३१५७ भूमिशय्याव्रत (पा) मुनियोंका मूल गुण जमीनपर सोना २।१२९ भूरिश्रवस् (व्य) महापुरके राजा ___सोमदत्तका पुत्र २४।५२ भूरिश्रवस् (व्य) एक राजा ५०७९ भूषाङ्ग = एक कल्पवृक्ष ७।८१ भृङ्गनिभा (भौ) मेरुके नैऋत्यमें स्थित एक वापिका५।३४३ भृङ्गराक्षस (व्य) नरमांसभोजी राक्षस तुल्य एक दुष्ट मनुष्य ४५१९४ भृङ्गा (भौ) मेरुके नैऋत्यमें स्थित वापिका ५।३४३ भृगु पहाड़की चट्टान १११२८ भोग (पा) चक्रवर्तीके दश भोग १ भाजन, २ भोजन, ३ शय्या, ४ सेना, ५ वाहन, ६ आसन, ७ निधि, ८ रत्न, ९ नगर, १० नाट्य ११११३१ भारत (भी) जम्बूद्वीपका दक्षिण दिशामें स्थित प्रथम क्षेत्र ५।१३ महिलपुर (भौ) एक नगर ६०।११ मारद्वाज (भी) देशका नाम १११६७ भाव = पदार्थ ४।२ मावादिविचय (पा)धर्मध्यानका एक भेद ५६।४७ भावन = असुरकुमार आदि भवनवासी देव ३।१३५ भावनाविधि = व्रतविशेष ३४।११२ भावसस्य (पा) दश प्रकारके सत्योंमें-से एक सत्य १०॥१०६ ११८ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.001271
Book TitleHarivanshpuran
Original Sutra AuthorJinsenacharya
AuthorPannalal Jain
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year2003
Total Pages1017
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Literature, & Story
File Size26 MB
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